Mehndi Dark Colour And Long Lasting Tips in Hindi मेहँदी का गहरा रंग पायें

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मेरे प्रिय शिक्षक पर निबंध Essay On My Favorite Teacher In Hindi

मेरे प्रिय शिक्षक पर निबंध Essay On My Favorite Teacher In Hindi Language

शिक्षा मानव विकास में बहुत ही बड़ी भूमिका का निर्वाह करती है और इस कार्य में शिक्षक की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होती है | इसलिए शिक्षक को देवतुल्य एंव माता-पिता से भी श्रेष्ठ माना गया है | प्राचीन काल में समान्यत: मंदिर एंव मठ शिक्षा के केंद्र थे एवं शिक्षा प्रदान करने वाले व्यक्ति, चाहे वह पुजारी हो या मठ में रहने वाला सन्यासी, को समाज में ईश्वर तुल्य सम्मान प्राप्त था | आधुनिक काल में शिक्षण के बड़े संस्थानों की स्थापना के बाद से तथा शिक्षा के निजीकरण एंव शिक्षकों के कुछ पेशेवर रवैयों के कारण उनके सम्मान में भले ही थोड़ी कमी हुई हो, किन्तु शिक्षकों के समाजिक महत्त्व एवं स्थान में आज भी कोई कमी नहीं हुई है | गुरु के महत्त्व के संदर्भ में कबीर की उक्ति सटीक बैठती है-

“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय |
बलिहारी गुरु आपनो, गोविंद दियो बताय ||”

मैं भी अपने शिक्षकों का सम्मान करता रहा हूं | आज मैं जो कुछ भी हूं, वह मेरे कई शिक्षकों के योगदान का ही परिणाम है | मुझे सुशिक्षित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले शिक्षकों की सूची काफी लंबी है | समय-समय पर मुझे कई शिक्षकों का सहयोग, मार्गदर्शन एंव परामर्श मिला | मैं उन सभी शिक्षकों का आभारी हूं, और जीवन भर आभारी रहूंगा | वे सभी मेरे प्रिय हैं, किन्तु उन सभी में एक ऐसे शिक्षक भी हैं, जो मेरे सर्वाधिक प्रिय शिक्षक रहे हैं जिनका नाम है- व्यास मुनि राय |

किसी भी विद्यालय की सफलता उसके शिक्षकों के व्यवहार पर निर्भर करती है | इसलिए शिक्षकों को अपनी भूमिका एवं कार्यों के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भली-भांति समझना पड़ता है | यद्यपि शिक्षक का मुख्य कार्य अध्यापन करना होता है, किन्तु अध्यापन के उद्देश्यों की पूर्ति तब ही हो सकती है जब वह इसके अतिरिक्त, विद्यालय की अनुशासन व्यवस्था में सहयोग करें, शिष्टाचार का पालन करें, अपने सहकर्मियों के साथ सकारात्मक व्यवहार करें एवं पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाकलापों में अपने साथी शिक्षकों एवं शिक्षार्थियों का सहयोग करें | इन सभी दृष्टिकोण से श्री व्यास मुनि राय को ‘आदर्श शिक्षक’ कहा जा सकता है | इसलिए वे न केवल छात्रों के बीच बल्कि शिक्षकों के बीच भी लोकप्रिय हैं एंव छात्रों के अभिभावक भी उनका सम्मान करते हैं |

एक आदर्श शिक्षक के रूप में वे धार्मिक कट्टरता, प्राइवेट ट्यूशन, नशाखोरी, इत्यादि से बचते हैं | वे सही समय पर विद्यालय आते हैं, शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षण-सहायक सामग्रियों का भरपूर प्रयोग करते हैं, छात्रों को हमेशा प्रोत्साहित करते हैं तथा अपने साथियों से भी मित्रतापूर्ण संबंध रखते हैं | उनकी विशेषता यह है कि वे हमेशा आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं | वे छात्रों को अच्छे कार्य के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते हैं | उन्हें पता है कि छात्रों का पर नियंत्रण कैसे रखा जाए | उन्हें मनोविज्ञान का अच्छा ज्ञान है, इस ज्ञान का प्रयोग वे शिक्षण-कार्य एंव छात्रों को निर्देशन तथा परामर्श देने में करते हैं | उन्हें समाज की आवश्यकताओं का भली-भांति ज्ञान है, इसलिए वे छात्रों को उनके नैतिक कर्तव्यों का ज्ञान कराते हैं | वे विनोदी स्वभाव के हैं | उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली है | इन्हीं कारणों से वे मेरे सबसे प्रिय शिक्षक हैं |

श्री व्यास मुनि राय ने दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से हिन्दी में स्नातकोत्तर की शिक्षा ग्रहण की है | उन्होंने हिन्दी के अतिरिक्त अंग्रेजी एवं भारतीय भाषाओं के विपुल साहित्य का भी अध्ययन किया है | शिक्षण के अलावा पढ़ना भी उनका शौक है | हिन्दी साहित्य उनका प्रिय विषय है | जब वे मधुर स्वर में कविता पाठ करते हैं, तो छात्र मन्त्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते हैं | उनकी व्याख्या इतनी सरल होती है कि सामान्य छात्रों को भी जटिल काव्य का अर्थ समझने में कोई कठिनाई नहीं होती |

वे शिक्षण के साथ-साथ पाठ्यक्रम सहगामी क्रियाओं में भी अत्यंत रुचि रखते हैं | वे समय-समय पर नगर-स्तरीय निबंध-प्रतियोगिता, कहानी प्रतियोगिता एंव काव्य-रचना प्रतियोगिता आयोजित कराते रहते हैं | इन आयोजनों का उद्देश्य क्षात्रों में रचनाशीलता का विकास करना होता है | इन कार्यक्रमों के अतिरिक्त वे भाषण प्रतियोगिता, गोष्ठी, नाटक एवं एकांकी का भी आयोजन करवाते हैं | कॉलेज प्रशासन ने इस हेतु ही उन्हें प्रभार भी दिया हुआ है |

श्री ब्यास मुनि राय का संप्रेषण एंव अध्यापन कौशल अद्वितीय है | वे जीवन में संप्रेषण कौशल के महत्त्व को समझते हैं | इसलिए वे छात्रों में संप्रेषण कौशल के विकास पर जोर देते हैं | छात्रों में संप्रेषण कौशल के विकास के लिए वे छदम साक्षात्कार, सामूहिक परिचर्चा एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित करवाते हैं |

व्यक्ति को शिष्ट आचरण की शिक्षा अपने घर, परिवार, समाज एवं स्कूल से मिलती है | बच्चे का जीवन उसके परिवार से प्रारंभ होता है | यदि परिवार के सदस्य गलत आचरण करते हैं तो बच्चा भी उसी का अनुसरण करेगा | परिवार के बाद बच्चा अपने समाज एंव स्कूल से सीखता है | यदि उसके साथियों का आचरण खराब होगा तो उससे उसके भी प्रभावित होने की पूरी संभावना बनी रहेगी | यदि शिक्षक का आचरण गलत है तो बच्चे भी निश्चित ही प्रभावित होंगे | इसलिए बच्चों को शिष्ट आचरण सिखाने की अपनी भूमिका को पूरा करते हुए वे छात्रों को शिष्ट आचरण की शिक्षा देते हैं |

श्री व्यास मुनि राय का कहना है कि बच्चों को अनुशासित रखने के लिए आवश्यक है कि शिक्षक एंव अभिभावक अपने आचरण में सुधार लाकर स्वयं अनुशासित रहते हुए बाल्यकाल से ही बच्चों में अनुशासित रहने की आदत डालें | वही व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासित रह सकता है, जिसे बाल्यकाल में ही अनुशासन की शिक्षा दी गई हो | बाल्यकाल में जिन बच्चों पर उनके माता-पिता लाड-प्यार के कारण नियन्त्रण नहीं रख पाते वे बच्चे अपने भावी जीवन में भी सफल नहीं हो पाते | अनुशासन के अभाव में कई प्रकार की बुराइयां समाज में अपनी जड़ों को विकसित कर लेती हैं | परिणामस्वरूप छात्रों का विरोध-प्रदर्शन, परीक्षा में नकल, शिक्षकों से बदसलूकी अनुशासनहीनता के उदाहरण हैं | इसका खामियाजा इन्हें बाद में जीवन की असफलताओं के रूप में भुगतना पड़ता है, किन्तु जब तक वे समझते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है | इसलिए वे छात्रों को अनुशासित रखने पर जोर देते हैं |

किसी मनुष्य की व्यक्तिगत सफलता में भी उसके शिष्टाचार एवं अनुशासित जीवन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है | जो छात्र अपने प्रत्येक कार्य नियम एवं अनुशासन का पालन करते हुए संपन्न करते हैं, वे अपने अन्य साथियों से न केवल श्रेष्ठ माने जाते हैं, बल्कि सभी के प्रिय भी बन जाते हैं | भारत के अनेकानेक महापुरुषों ही की भांति श्री व्यास मुनि राय भी एक महापुरुष की तरह अपने कर्मों से सबको शिष्ट एंव अनुशासित रहने की प्रेरणा देते हैं | इसलिए वे केवल मेरे ही नहीं बल्कि अनेक अन्य छात्रों एवं उनके अभिभावकों के सम्मान के पात्र हैं | उनके कई छात्रों ने अब तक उनकी शिक्षा, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से जीवन पथ पर ढेरों सफलताएं अर्जित की है | आशा है कि आने वाले समय में भी वे इसी तरह अपने छात्रों का मार्गदर्शन कर उनकी सफलता में भागीदार बनते रहेंगे |

Height Kaise Badaye Tips In Hindi हाइट कैसे बढ़ाये

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शिष्टाचार पर निबंध Essay On Etiquettes And Manners In Hindi

शिष्टाचार पर निबंध Essay On Etiquettes And Manners In Hindi Language

एक व्यक्ति नौकरी के लिए साक्षात्कार में सम्मिलित हुआ, उसकी नियुक्ति की संभावना अधिक थी, क्योंकि उसके पास पद के अनुकूल पर्याप्त शैक्षिक योग्यता थी | किन्तु, साक्षात्कार के बाद निकले परिणाम में अपना नाम न देखकर उसे आश्चर्य हुआ | उसमें संस्थान के प्रबंधक से इस बारे में बात की | प्रबंधक ने जवाब दिया कि वास्तव में आपके पास पद के अनुकूल शैक्षिक उपाधियां तो हैं, किन्तु आपने अभी तक भी उपयुक्त व्यवहार करना नहीं सीखा है | साक्षात्कार के दौरान ही नियोक्ता को यह आभास हो गया था कि वह व्यक्ति अत्यधिक घमंडी एवं अशिष्ट है | इसलिए उपयुक्त शैक्षिक योग्यता के रहते हुए भी उसे नियुक्त नहीं किया गया | इस तरह स्पष्ट है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए व्यक्ति का आचरण सही होना चाहिए | व्यक्ति का जैसा आचरण होगा, उसी के अनुकूल उसे परिणाम भी प्राप्त होगा | कोई व्यक्ति कम योग्यता रखते हुए भी कम समय में अपने सदआचरण एंव व्यवहार कुशलता के कारण सफलता की सीढ़ियां तेजी से चढ़ सकता है और कोई अत्यधिक उपाधियों से युक्त होने के बावजूद भी जीवन भर असफल ही रह सकता है | इसलिए अंग्रेजी में कहा गया है- “इट इज योर एटीट्यूड, मोर दैन योर एप्टीट्यूड, दैट डिटरमाइन्स योर एल्टीट्यूड”, अर्थात “आपकी योग्यता से कहीं अधिक आपका व्यवहार आपकी ऊंचाई को निर्धारित करता है |”

‘शिष्टाचार’ दो शब्दों ‘शिष्ट’ एंव ‘आचार’ के मेल से बना है | शिष्ट का अर्थ होता है- सभ्य, उचित अथवा सही तथा आचार का अर्थ होता है- व्यवहार | व्यक्ति को हर समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह किससे बात कर रहा है, कहां बात कर रहा है एंव क्यों बात कर रहा है | उदाहरण के तौर पर पति-पत्नी यदि सार्वजनिक स्थल पर सबके सामने अंतरंग बातें करते हैं, तो इसे अशिष्टता ही कहा जाएगा | सामान्य व्यवहार ही नहीं बातचीत करने के ढंग से भी व्यक्ति के व्यवहार का पता चल जाता है | इसलिए किसी भी बातचीत में शिष्टाचार के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए | बातचीत करते हुए हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम किससे बात कर रहे हैं | बड़ों से बात करते हुए हमें आदरसूचक शब्दों का प्रयोग करना ही चाहिए |

सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान, किसी व्यक्ति से गाली-गलौज, अपने साथियों से अकड़कर बात करना, राह चलते किसी से बिना-वजह झगड़ना इत्यादि अशिष्ट आचरण के उदाहरण हैं | बड़ों का आदर-सम्मान करना, अपने मित्रों एंव सहयोगियों के प्रति सहयोगात्मक रवैया, छोटों के प्रति स्नेह की भावना, सकरात्मक विचारधारा, स्थान-विशेष के अनुकूल व्यवहार इत्यादि शिष्टाचार के उदहारण हैं | शालीनता एवं विनम्रता शिष्टाचार के ही घटक हैं |

प्रायः संस्कृति में अंतर के कारण भी शिष्टाचार एवं सामान्य व्यवहार में अंतर होता है | पश्चिमी देशों में जिसे सामान्य व्यवहार कहा जाता है, वह आवश्यक नहीं कि भारत में भी सामान्य ही माना जाए | पश्चिमी देशों में खुलेआम लोग अपने प्रेम का प्रदर्शन करते दिखते हैं | वहां सार्वजनिक स्थलों पर प्रेमी जोड़े को एक-दूसरे से प्रेमलाप में लिप्त दिखना सामान्य बात है | किन्तु, भारतीय सभ्यता-संस्कृति इस बात की कतई अनुमति नहीं देती |

कोई व्यक्ति अपने घर पर जिस तरह अपनी इच्छानुसार रहता है, उस तरह उसे बाहर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है | सार्वजनिक स्थलों पर रहते हुए भी इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि हमारा कोई आचरण अशिष्ट न हो | बस, ट्रेन या किसी गाड़ी में सफर करते समय धूम्रपान करना अशिष्टता की निशानी है | ऐसा करते वक्त लोग इस बात का ध्यान नहीं रखते कि इससे किसी अन्य यात्री को तकलीफ भी हो सकती है | किसी विद्यालय, महाविद्यालय अथवा कार्यालय में व्यक्ति का व्यवहार संस्थान के नियमों के अनुकूल होना चाहिए |

अशिष्ट आचरण युद्ध, झगड़े एंव गलतफहमी का कारण बनता है | अशिष्ट आचरण के परिणामस्वरुप व्यक्ति अपने उद्देश्य में असफल हो सकता है | यदि दुकानदार अपने ग्राहकों से अशिष्टता करे, तो उसके यहां आने वाले ग्राहकों की संख्या निस्संदेह कम होती चली जाएगी और एक दिन ऐसा भी हो सकता है कि उसे अपनी दुकान ही बंद करनी पड़े | यदि विद्यालय में शिक्षक का आचरण सही न हो, तो इसका दुष्प्रभाव छात्रों पर भी पड़ सकता है | और, ऐसी स्थिति में कोई भी समझदार प्राचार्य या विद्यालय प्रबंधक ऐसे शिक्षक को अपने संस्थान में रहने नहीं देना चाहेगा | इस तरह, यदि कर्मचारी कार्यालय में अपने संस्थान के नियमानुकूल व्यवहार न करें तो उसे उसकी नौकरी से वंचित किया जा सकता है |

शिष्टाचार व्यक्ति को अनुशासन की प्रेरणा देता है | मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है | अनुशासन के बिना किसी भी समाज में अराजकता का माहौल व्याप्त होना स्वाभाविक है | इसी तरह एक परिवार के सदस्य यदि अनुशासित न हों, तो उस परिवार का अव्यवस्थित होना स्वाभाविक है | सरकारी कार्यालयों में यदि कर्मचारी अनुशासित न हो, तो वहां भ्रष्टाचार का बोलबाला हो जाएगा | अनुशासन न केवल व्यक्तिगत हित बल्कि सामाजिक हित के दृष्टिकोण से भी अनिवार्य है | किन्तु, वही मनुष्य अनुशासित रह सकता है, जो शिष्टाचारी हो |

व्यक्ति को शिष्ट आचरण की शिक्षा अपने घर, परिवार, समाज एवं स्कूल से मिलती है | बच्चे का जीवन उसके परिवार से प्रारंभ होता है | यदि परिवार के सदस्य गलत आचरण करते हैं, तो बच्चा भी उसी का अनुसरण करेगा | परिवार के बाद बच्चा अपने समाज एंव स्कूल से सीखता है | यदि उसके साथियों का आचरण खराब होगा तो उससे उसके भी प्रभावित होने की पूरी संभावना बनी रहेगी | यदि शिक्षक का आचरण गलत है, तो बच्चे कैसे सही हो सकते हैं | इसलिए यदि हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे अनुशासित हो, तो इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने आचरण में सुधार लाकर स्वयं अनुशासित रहते हुए बाल्यकाल से ही बच्चों में अनुशासित रहने की आदत डालें | वही व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासित रह सकता है, जिसे बाल्यकाल में ही अनुशासन की शिक्षा दी गई हो | बाल्यकाल में जिन बच्चों पर उनके माता-पिता लाड-प्यार के कारण नियंत्रण नहीं रख पाते वही, बच्चे आगे चलकर अपने जीवन में कभी सफल नहीं हो पाते | अनुशासन के अभाव में कई प्रकार की बुराइयां समाज में अपनी जड़ें विकसित कर लेती हैं | छात्रों के नित्य-प्रति होने वाले विरोध-प्रदर्शन, परीक्षा में नकल, शिक्षकों से बदसलूकी अनुशासनहीनता के ही उदाहरण हैं | इसका खामियाजा उन्हें बाद में जीवन की असफलताओं के रूप में भुगतना पड़ता है, किन्तु जब तक वे समझते हैं तब तक देर हो चुकी होती है | इसलिए जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति शिष्टाचार का पालन करे | क्योंकि एक व्यक्ति का व्यवहार एंव आचरण ही दूसरे लोगों में उसके प्रति दृष्टिकोण निर्धारित करता है | इस प्रकार शिष्टाचार सफलता का मापदंड भी है |

नीयत और इनाम – एक बूढ़े कारपेंटर की कहानी

(((((((( नीयत और इनाम ))))))))
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एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था, उसके बनाये लकड़ी के घर दूर -दूर तक प्रसिद्द थे. पर अब बूढा हो जाने के कारण उसने सोचा कि बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए…
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और वह अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा और बोला, ठेकेदार साहब, मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर अब मैं बाकी का समय आराम से पूजा-पाठ में बिताना चाहता हूँ, कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें.
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ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था, इसलिए उसे ये सुनकर थोडा दुःख हुआ पर वो कारपेंटर को निराश नहीं करना चाहता था,
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उसने कहा, आप यहाँ के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं, आपकी कमी यहाँ कोई नहीं पूरी कर पायेगा लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले एक आखिरी काम करते जाइये.
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जी, क्या काम करना है..? कारपेंटर ने पूछा.
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मैं चाहता हूँ कि आप जाते -जाते हमारे लिए एक और लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये, ठेकेदार घर बनाने के लिए ज़रूरी पैसे देते हुए बोला.
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कारपेंटर इस काम के लिए तैयार हो गया. उसने अगले दिन से ही घर बनाना शुरू कर दिया, पर ये जान कर कि ये उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ नहीं करना होगा वो थोड़ा ढीला पड़ गया .
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पहले जहाँ वह बड़ी सावधानी से लकड़ियाँ चुनता और काटता था अब बस काम चालाऊ तरीके से ये सब करने लगा .
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कुछ एक हफ्तों में घर तैयार हो गया और वो ठेकेदार के पास पहुंचा, ठेकेदार साहब, मैंने घर तैयार कर लिया है, अब तो मैं काम छोड़ कर जा सकता हूँ ?
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ठेकेदार बोला, हाँ, आप बिलकुल जा सकते हैं लेकिन अब आपको अपने
पुराने छोटे से घर में जाने की ज़रुरत नहीं है…
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क्योंकि इस बार जो घर आपने बनाया है वो आपकी बरसों की मेहनत का इनाम है; जाइये अपने परिवार के साथ उसमे खुशहाली से रहिये..!!
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कारपेंटर यह सुनकर स्तब्ध रह गया, वह मन ही मन सोचने लगा, कहाँ मैंने दूसरों के लिए एक से बढ़ कर एक घर बनाये और अपने घर को ही इतने घटिया तरीके से बना बैठा… काश मैंने ये घर भी बाकी घरों की तरह ही बनाया होता.
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मित्रो, कब आपका कौन सा काम किस तरह आप पर असर कर सकता है ये बताना मुश्किल है. ये भी समझने की ज़रुरत है कि हमारा काम हमारी पहचान बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है.
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इसलिए हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम हर एक काम अपनी पूरी लगन तथा ईमानदारी के साथ करें फिर चाहे वो हमारा आखिरी काम ही क्यों न हो !
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ट्वेन्टी-20 क्रिकेट पर निबंध Essay On T20 Cricket In Hindi

ट्वेन्टी-20 क्रिकेट पर निबंध Essay On T20 Cricket In Hindi Language

क्रिकेट दुनिया का सर्वाधिक लोकप्रिय खेल बन चुका है | दर्शकों की क्रिकेट के प्रति दीवानगी देखते ही बनती है | वैसे तो इसके सभी प्रारूप लोकप्रिय हैं, किन्तु अत्यधिक रोमांच एवं कम समयावधि के कारण अब बीस-बीस ओवरों तक सीमित क्रिकेट सर्वाधिक लोकप्रिय हो गया है इसे ट्वेन्टी-20 क्रिकेट की संज्ञा दी जाती है | क्रिकेट के इस प्रारूप की शुरुआत इंग्लैंड में 2003 ई. में हुई | टेस्ट एंव एकदिवसीय क्रिकेट मैचों में अत्यधिक समय लगता है एंव कभी-कभी खेल में रोमांच भी नहीं रहता, इसलिए कम समय में मैच को समाप्त कर बेहतर मनोरंजन एंव खेल के रोमांच को बढ़ाने के उद्देश्य से ट्वेंटी-20 क्रिकेट मैचों की शुरुआत हुई |

भारत ने अपना पहला ट्वेन्टी-20 मैच 1 दिसंबर 2006 को जोहांसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध खेला था, जिसमें यह 6 विकेट से विजयी रहा था | दक्षिण अफ्रीका में ही सितंबर 2007 में आयोजित प्रथम ट्वेन्टी-20 क्रिकेट विश्वकप में भी भारत विजेता रहा था | ट्वेन्टी-20 क्रिकेट विश्वकप का आयोजन प्रत्येक दो वर्ष के पश्चात किया जाता है | क्रिकेट के इस प्रारूप सम्बन्धी नियमों को बनाकर उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आई.सी.सी.) निभाता है | इसका मुख्यालय दुबई में है | यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले पुरुष एवं महिला क्रिकेट दोनों का नियन्त्रण करता है |

ट्वेन्टी-20 क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बी.सी.सी.आई.) द्वारा आयोजित इंडियन प्रीमियर लीग (आई.पी.एल.) का योगदान महत्त्वपूर्ण रहा है | पहला आई.पी.एल. टूर्नामेंट 2008 में खेला गया | आई.पी.एल. में दुनिया भर के क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अनुबंध किया जाता है | इसमें कम चर्चित तथा युवा खिलाड़ियों को भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल जाता है | क्रिकेट के इस प्रारूप से जहां इसके रोमांच में वृद्धि हुई है, वही इसने खेलों के व्यवसायीकरण को भी बढ़ावा दिया है | उद्योगपति एंव फ़िल्मी सितारे इसमें ऊंची बोली लगाकर टीमों एंव खिलाड़ियों को खरीदते हैं | खेल के इस व्यवसायीकरण के कारण क्रिकेट में भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता है एंव खेल-भावना को काफी छति पहुंची है | लोग इसे अब धन कमाने का जरिया समझने लगे हैं | इससे सट्टेबाजी एवं मैच फिक्सिंग को भी बढ़ावा मिला है |

ओवरों की संख्या एवं कुछ अन्य बातों को छोड़ दिया जाए, तो इसे खेलने का तरीका अन्य क्रिकेट प्रारूप से भिन्न नहीं है | एक ट्वेन्टी-20 क्रिकेट मुकाबले में 11 खिलाड़ियों के दो दल शामिल होते हैं | दोनों ही दलों के कप्तान पहले टॉस करते हैं फिर टॉस जीतने वाले कप्तान की इच्छा के अनुसार क्रमवार बालिंग और बैटिंग का चयन करते हैं |

टॉस में विजयी कप्तान यदि बैटिंग का चयन करता है, तो पराजित कप्तान के दिल को फील्डिंग करनी होती है | ट्वेन्टी-20 मैचों में ओवर-दर-ओवर मैच के रोमांच में वृद्धि होती जाती है और दर्शक वर्ग चर्मोत्कर्ष में उछल-उछल जाते हैं | बल्लेबाजी के दौरान बल्लेबाज सुरक्षा दृष्टिकोण से हेलमेट भी धारण करते हैं क्योंकि गेंदबाजों की विविधता भरी गेंदबाजी से चोट लगने की प्रबल आशंका रहती है | एक दल द्वारा निर्धारित ओवरों के दौरान बनाए रन ही विपक्षी दल का लक्ष्य होते हैं और कुल रनों से ज्यादा रन विजयी होने के लिए बनाने होते हैं | मैच के दौरान दोनों ही दलों द्वारा भरपूर प्रयास किए जाते हैं | बल्लेबाजी करने वाला दल अधिकाधिक रन बटोरने को प्रयासरत रहता है, तो गेंदबाजी करने वाला दल रन-गति को रोकने के लिए भरपूर प्रयास करता है | इस प्रकार से दोनों दलों के मध्य की यह मशक्कत ही इस खेल में रोमांच पैदा करती है | बल्लेबाज जहां अपना सर्वश्रेष्ठ रन देने को कटिबद्ध होता है वहीं गेंदबाज भी रन-गति को नियंत्रित करने का हर संभव प्रयास करता है |

खेल के दौरान जहाँ बल्लेबाज रन-गति पर निरंतर निगाह रखते हैं, वहीं गेंदबाज और विपक्षी दल का कप्तान भी निरंतर रन-गति को नियंत्रित करने के लिए उपयुक्त फील्ड-सैटिंग को प्रयासरत रहते हैं | मैच के दौरान अंपायर की भी प्रमुख भूमिका होती है | वह विभिन्न संकेतों के द्वारा आउट होने, चौके-छक्के और थर्ड अम्पायर द्वारा निर्णय लिए जाने के बारे में बताता है | अम्पायर का कोई भी निर्णय निर्विवाद रूप से मान्य होता है | मैदान पर मौजूद दोनों टीमों के खिलाड़ी अम्पायर के निर्णय को मानने को बाध्य होते हैं | पहले बल्लेबाजी करने वाला दल पारी समाप्त होने पर विपक्षी दल के लिए लक्ष्य रख देता है | तदुपरांत दूसरी पारी में विपक्षी दल उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास करता है | यदि विपक्षी दल के सभी सदस्य लक्ष्य की बराबरी कर आउट हो जाते हैं तो वह मैच ‘ड्रा’ या ‘टाई’ मान लिया जाता है | वर्तमान में महेंद्र सिंह धोनी भारतीय ट्वेन्टी-20 क्रिकेट टीम के कप्तान हैं |

ट्वेन्टी-20 क्रिकेट में दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार हावी रहने की कोशिश करते हैं | यद्यपि इससे मैच के दौरान आक्रमकता में भी वृद्धि हुई, फिर भी मनोरंजन एंव रोमांच की दृष्टि से ट्वेन्टी-20 क्रिकेट मैच का कोई अन्य विकल्प नहीं है | इसने क्रिकेट की लोकप्रियता में अविश्वसनीय वृद्धि की है |

मेहंदीपुर बालाजी मंदिर Mehandipur Balaji Temple

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यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता Essay On If I Were A Prime Minister In India In Hindi

यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता Essay On If I Were A Prime Minister In India In Hindi Language

स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व और मैं लाल-किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने के बाद देश की जनता को संबोधित करते हुए भाषण दे रहा था | इस भाषण में देश के विकास के लिए मेरे द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन तो था ही, साथ ही आने वाले वर्षों में मेरे द्वारा किए जाने वाले कार्यों का भी वर्णन था | मैं अभी भाषण दे ही रहा था कि अचानक मेरी नींद खुल गई और मैंने अपने आपको बिस्तर पर पाया | मैं वास्तव में प्रधानमंत्री होने का खूबसूरत सपना देख रहा था | सपना टूटने के बाद मैंने सोचा कि ‘काश’, मैं भारत का प्रधानमंत्री होता |

भारत में प्रधानमंत्री का पद अति महत्वपूर्ण है | इसलिए प्रधानमंत्री बनना किसी भी भारतीय नागरिक के लिए गौरव की बात है | प्रधानमंत्री का पद जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही अधिक जिम्मेदारी भरा भी, इसके बावजूद लगभग हर भारतीय का सपना प्रधानमंत्री बनना होता है | यदि मैं भी जीवन में कभी इस पद पर पहुंचने में कामयाब रहा, तो यह मेरे लिए गौरव की बात होगी | एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में भारत के प्रधानमंत्री से मेरी भी कुछ उम्मीदें हैं | यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता, तो अपनी इन उम्मीदों पर बिल्कुल खरा उतरने की कोशिश करता | भारत के प्रधानमंत्री के रुप में मेरी निम्नलिखित प्राथमिकताएं होंगी-

शिक्षा का उचित प्रसार– देश के प्रधानमंत्री के रूप में सबसे पहले मैं भारत में शिक्षा के उचित प्रसार पर ध्यान देता | किसी भी देश का आर्थिक विकास इस बात पर निर्भर करता है कि उसके नागरिक कितने शिक्षित हैं | समय के अनुसार विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी में परिवर्तन को देखते हुए भारतीय शिक्षा प्रणाली में भी इनको प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता है | मैं शिक्षा द्वारा उत्पादकता बढ़ाने के लिए विज्ञान की शिक्षा, कार्यानुभव एवं व्यावसायिक शिक्षा पर जोर देता |

आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रयास– एक देश तब ही प्रगति की राह पर अग्रसर हो सकता है, जब उसके नागरिक अपने देश में सुरक्षित हों | असुरक्षा की भावना न केवल नागरिकों का जीना दूभर कर देती है, बल्कि इससे देश की शांति एंव सुव्यवस्था के साथ-साथ इसकी प्रगति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | आज भारत निसंदेह बहुत तेजी से प्रगति कर रहा है, किन्तु इसकी आंतरिक सुरक्षा के समक्ष ऐसी चुनौतियां हैं, जो इसकी शांति एंव सुव्यवस्था पर प्रश्न-चिंह लगा रही हैं | संप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, आतंकवाद, अलगावाद, भाषावाद, नक्सलवाद इत्यादि भारत की आंतरिक सुरक्षा के समक्ष ऐसी ही कुछ खतरनाक चुनौतियां हैं | मैं इन समस्याओं का समाधान कर आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने का प्रयास करता |

राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का प्रयास– भारत में कई धर्मों एंव जातियों के लोग रहते हैं, जिनके रहन-सहन एवं आस्था में अंतर तो है ही साथ ही उनकी भाषाएं भी अलग-अलग हैं | इन सबके बावजूद पूरे भारतवर्ष के लोग भारतीयता की जिस भावना से ओत-प्रोत रहते हैं, उसे राष्ट्रीय एकता का विश्व-भर में सर्वोत्तम उदाहरण कहा जा सकता है | इसी भावना का परिणाम है कि जब कभी भी हमारी एकता को खंडित करने का प्रयास किया जाता है, भारत का एक-एक नागरिक सजक होकर ऐसी असामाजिक शक्तियों के विरुद्ध खड़ा दिखाई पड़ता है | राष्ट्र की आंतरिक शांति तथा सुव्यवस्था और बाहरी दुश्मनों से रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक है | यदि हम भारतवासी किसी कारणवश छिन्न-भिन्न हो गए तो अन्य देश हमारी स्वतंत्रता को हड़पने का प्रयास करेंगे | इसलिए मैं भारत की सबसे बड़ी विशेषता ‘विविधता में एकता’ को महत्व देते हुए भारत की राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने का प्रयास करता |

राजनीतिक स्थिरता के प्रयास– पिछले कुछ वर्षों में भारत में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिली है | राजनीतिक दलों की अधिक संख्या के कारण प्राय: किसी एक दल को बहुमत नहीं मिल पाता एंव गठबंधन की राजनीति को बढ़ावा मिलता है | गठबंधन की राजनीति कई प्रकार के राजनीतिक भ्रष्टाचार को जन्म देती है | इसलिए मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राजनीतिक स्थिरता के लिए राजनीति में अपराधीकरण की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रण करने का प्रयास करता | राजनीति में अपराधीकरण की प्रवृत्ति पर नियंत्रण के बाद काफी हद तक भारत में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति समाप्त हो सकेगी |

समाजिक समस्याओं का समाधान– धार्मिक कट्टरता, जाति प्रथा, अंधविश्वास, नारी-शोषण, दहेज-प्रथा, सामाजिक शोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा, जनसंख्या-वृद्धि, भ्रष्टाचार, गरीबी इत्यादि हमारी प्रमुख सामाजिक समस्याएं हैं | ऐसा नहीं है कि ये सभी सामाजिक समस्याएं हमेशा से ही हमारे समाज में विद्यमान रही हैं, कुछ समस्याओं की जड़ धार्मिक कुरीतियां हैं, तो कुछ ऐसी समस्याएं भी हैं, जिन्होंने सदियों की गुलामी के बाद समाज में अपनी जड़ें स्थापित कर लीं, जबकि कुछ समस्याओं के मूल में दूसरी पुरानी समस्याएं रही हैं | देश एंव समाज की वास्तविक प्रगति के लिए इन समस्याओं का शीघ्र समाधान आवश्यक है | एक प्रधानमंत्री के रुप में मैं बेरोजगारी की समस्या का समाधान करने के लिए व्यावहारिक एंव व्यावसायिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर लोगों को स्वरोजगार अर्थात निजी उद्यम एंव व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रेरित करता | बेरोजगारी को कम करने से गरीबी को कम करने में भी मदद मिलती | गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ापन आदि दूर होने के बाद भ्रष्टाचार में स्वभाविक रुप से कमी होती | मैं भ्रष्ट अधिकारियों को सजा दिलवाने के लिए दंड-प्रतिक्रिया एवं दंड संहिता में संशोधन कर कानून को और कठोर बनाता तथा भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाता | बेरोजगारी, गरीबी, जनसंख्या वृद्धि, नारी-शोषण, अशिक्षा एवं भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं का समाधान हो जाने के बाद शेष समस्याओं का समाधान स्वत: ही हो जाता |

आर्थिक चुनौतियों का समाधान– पिछले दशकों में भारत की आर्थिक वृद्धि हालांकि संतोषजनक रही है, किन्तु अभी भी यह विश्व में वह स्थान प्राप्त नहीं कर पाया है जिसका यह हकदार है | इसका कारण यह है कि इसके सामने अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं, जिनका समाधान किए बगैर इसके आर्थिक विकास को समुचित गति नहीं मिल सकती | जनसंख्या-वृद्धि, आर्थिक विषमता, भ्रष्टाचार, गरीबी, सामाजिक शोषण, बेरोजगारी, अशिक्षा, औद्योगीकरण की मन्द प्रक्रिया इत्यादि भारत में आर्थिक विकास की कुछ मुख्य चुनौतियां हैं | प्रधानमंत्री के रुप में मैं इन आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिश करता |

भारतीय विदेश नीति में सुधार– अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के क्षेत्र में किसी भी देश की स्थिति तब ही सुदृढ़ हो सकती है, जब उसकी विदेश नीति सही हो | भारत एक शांतिप्रिय देश है | दुनिया भर में शांति को बढ़ावा देने एंव परस्पर सहयोग के लिए मैं भारतीय विदेश नीति में सुधार करता |

महंगाई पर नियंत्रण– आज जिस तरह से महंगाई का ग्राफ ऊपर जा रहा है, उससे हर इंसान परेशान है | दूध, पेट्रोल, अनाज, रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी का जीवन दूभर कर दिया है | इस पर समय रहते यदि नियन्त्रण नहीं किया गया, तो अनेक जटिलताओं, बुराइयों एंव भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि मंद पड़ जाएगी | महंगाई की मार आम आदमी पर सर्वाधिक पड़ती है, जिससे उसका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है | फलस्वरुप पूरे देश की आर्थिक वृद्धि प्रभावित होती है | अतः महंगाई पर नियंत्रण के लिए यथाशीघ्र कड़े से कड़े कदम उठाते हुए मैं जमाखोरी, मुनाफाखोरी एवं कालाबाजारी को समाप्त करता |

इस तरह स्पष्ट है कि यदि मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो देश एंव देश की जनता को सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक एवं शैक्षिक सुदृढ़ कर भारत को पूर्णत: विकसित ही नहीं खुशहाल देश बनाने का अपना सपना साकार करता |

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