बावची उपयोग करने के फायदे Benefits (Fayde) Of Babchi In Hindi

बावची उपयोग करने के फायदे Benefits (Fayde) Of Bavchi In Hindi

बावची के पौधे सारे भारत वर्ष में खाली पड़ी कंकरीली भूमि में अन्य झाड़ियों के आसपास अपने आप उग आते हैं, लेकिन कहीं-कहीं इनकी खेती भी की जाती है। इसके पौधे की आयु एक वर्ष, ऊंचाई 1 से 4 फुट होती है। पते की लंबाई 1 से 3 इंच, गोलाकार लिए, दोनों तरफ से चिकने, चमकदार, काले बिंदुओं जैसे धब्बे युक्त होते हैं।

पते की बगल से निकली मंजरी पर छोटे 10 से 30 की संख्या में, इकट्ठे समूह में बैंगनी या जामुनी रंग के पुष्प लगते हैं। काले रंग की लंबी फली में मसूर के दाने के समान काले बीज, बेल फल की खुशबू लिए निकलते हैं।

यहाँ पर ये बाते जानेंगे –

  1. सफेद दाग, कुष्ठ रोग में उपयोग बावची White stains, leprosy is used in leprosy
  2. दंत कृमि पीड़ा में बावची से लाभ Benefits from Dry worm pain
  3. खांसी में बावची का सेवन Khansi Me Babchi Ka Sevan
  4. दस्त और पेचिस में बावची का सेवन Dast Aur Pachis Me Babchi Ka Sevan
  5. मुंहासे, दाद – खाज के लिए लाभकारी बावची Muhaase, Daad-Khaaj Ke Liye Labhkari Babchi
  6. माथे की बिंदिया का सफेद दाग White stain of forehead
  7. गांठ पर लगाये बावची Gaath Per Lagaye Babchi
  8. पीलिया में बावची चूर्ण का सेवन Jaundice Me Babchi Churn Ka Sevan
  9. बवासीर के लिए बावची का सेवन Bavaseer Ke Liye Babchi Ka Sevan

बावची के विभिन्न भाषाओं में नाम Babchi Ke Vibhinn Bhasaao Me Name

  • संस्कृत (Babchi In Sanskrit) – बाकुची।
  • हिंदी(Babchi In  Hindi) – बावची।
  • मराठी(Babchi In Marathi) – वावची।
  • गुजराती(Babchi In  Gujarati) – बावची।
  • बंगाली (Babchi In Bangali) – हाकुच, सोमराज ।
  • अंग्रेज़ी(Babchi In English) – एस्क्यूलियूट (Esculeut Fiacourtia)
  • लैटिन(Babchi In Latin) — सोरेलिआ कोरिलीफोलिआ (Psoralia Corylifolia) |

बावची के गुण Babchi Ke Gun

आयुर्वेदिक मतानुसार बावची रस में कटु, तिक्त, गुण में हलकी, रुक्ष, विपाक में चरपरी, प्रकृति में गर्म, वात-कफ नाशक, रुचिकारक, पित्तजनक, रक्त पित का नाश करने वाली, बाजीकारक, हृदय के लिए हितकारी होती है। यह ज्वर, क्रमी, कुष्ठ स्वास,बवासीर,खांसी, सूजन, पाण्डुरोग,वमन,दाँत के कीड़े  में गुणकारी है।

वैज्ञानिक मतानुसार बावची के रासायनिक संगठन का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके फल में उड़नशील तेल, स्थिर तेल, तारपीन की तरह का तेल, रवेदार पदार्थ सोरलेन और आइसो सीरलेन पाए जाते हैं।

बाकुची के बीजों से प्राप्त तेल सफेद दाग, दाद, खाज, मुंहासों, झांई जैसे चर्म विकारों में बहुत लाभदायक पाया गया है। उपरोक्त तत्वों के कारण बावची कृमिनाशक और जीवाणुनाशक भी होती है।

बावची के विभिन्न रोगों में प्रयोग और आयुर्वेदिक घरेलु नुस्खे  Babchi Ke Vibhinn Rogo Me Prayog Aur Ayurvedic Gharelu Nuskhe –

1. सफेद दाग, कुष्ठ रोग में उपयोग बावची White stains, leprosy is used in leprosy :

सफ़ेद दाग को दूर करने के बाबची का उपयोग सदियों से होता आया है | बावची के बीज और खाने वाले काले तिल समभाग मिलाकर पीस लें। एक चम्मच की मात्रा में ठंडे पानी से सुबह नियमित रूप से एक वर्ष सेवन करने और बावची का तेल सुबह-शाम लगाते रहने से रोग में पूर्ण लाभ होगा।

इसे सेवन करते समय धर्य जरूर रखें क्योकि रोग को ठीक होने में समय लगता है |

2. दंत कृमि पीड़ा में बावची से लाभ Benefits from Dry worm pain :

बाबची को दांतों के कीड़े मारने के लिए भी जाना जाता है | बावची की जड़ को पीसकर जरा-सी मात्रा में भुनी हुई फिटकिरी मिला लें। सुबह-शाम इससे मंजन करने से दांत के कीड़े नष्ट हो जाएंगे। दर्द दूर होकर दांत मजबूत होंगे।

3. खांसी में बावची का सेवन Khansi Me Babchi Ka Sevan

बाबची को खांसी ठीक करने में बहुत पुराने समय से जाना जाता है | इसके लिए आधा चम्मच बीजों का चूर्ण अदरक के रस के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करने से खांसी में आराम मिलेगा। कफ ढ़ीला होकर निकल जाएगा।

4. दस्त और पेचिस में बावची का सेवन Dast Aur Pachis Me Babchi Ka Sevan

बाबची को पेट के रोगों को ठीक करने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है | यदि किसी को दस्त लग गए हो या पेचिश की शिकायत हो तो इसका प्रयोग कर रोग से छुटकारा पाया जा सकता है | लेकिन बच्चों पर इसे इस्तेमाल न करें | दस्त या पेचिश रोग होने पर बावची के पत्तों का साग, दही और अनारदाने के साथ सुबह-शाम सेवन कराएं। इसका सेवन करने ये रोग जल्दी ही ठीक हो जाता हैं |

5. मुंहासे, दाद – खाज के लिए लाभकारी बावची Muhaase, Daad-Khaaj Ke Liye Labhkari Babchi

त्वचा रोगों को ठीक करने में बाबची के बीजों इस्तेमाल किया जाता है | इसके बीजों का तेल त्वचा रोगों में लाभकारी होता है | मुहासे और दाद – खाज रोग को ठीक करने के लिए बावची के बीजों का तेल सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ हफ्ते लगाते रहने से बहुत लाभ होता है। एक महीने में पुराना से पुराना रोग भी ठीक हो जाता है |

6. माथे की बिंदिया का सफेद दाग White stain of forehead :

बावची के कुछ बीजों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय माथे के धब्बे वाले स्थान पर 3-4 हफ्ते तक लगाएं। दाग, धब्बा दूर हो जाएगा। इसी जगह बावची का तेल लगाने से भी यही लाभ मिलता है।

7. गांठ पर लगाये बावची Gaath Per Lagaye Babchi :

शरीर में कई जगह गाँठ पद जाती है जिससे त्वचा खराब दिखने लगती है | बाबची इस रोग को ठीक करने में लाभकारी होती है | बाबची के बीजों को पीसकर गांठ पर बांधते रहने से वह बैठ जाएगी।

8. पीलिया में बावची चूर्ण का सेवन Jaundice Me Babchi Churn Ka Sevan :

पीलिया रोग को ठीक करने में बावची का बड़ा फायदा होता है | बावची के बीजों का प्रयोग इस रोग को ठीक करने में इस्तेमाल किया जाता है | इसके लिए 10 मिलीलीटर पुनर्नवा के रस में आधा चम्मच पिसी हुई बावची के बीजों का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से लाभ होगा।

9. बवासीर के लिए बावची का सेवन Bavaseer Ke Liye Babchi Ka Sevan :

बवासीर रोग को ठीक करने में बावची बहुत उपयोगी होता है | बावची के बीज इस काम में लाये जाते हैं | हरड़, सोंठ और बावची के बीज समभाग मिलाकर पीस लें। आधा चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से लाभ मिलेगा। इसे आपको लगभग एह माह तक इस्तेमाल करना होगा और फायदा दिखेगा | यदि एक माह में पूरी तरह से ठीक न हो तो आप इसे आगे भी इस्तेमाल करे जब तक कि रोग पूरी तरह से ठीक न हो जाय |

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