भटकटैया के फायदे और नुस्खे हिंदी में Bhatkatiya Ke Fayde Aur Nuskhe In Hindi

भटकटैया के फायदे और नुस्खे हिंदी में Bhatkatiya Ke Fayde Aur Nuskhe In Hindi

भटकटैया सारे भारत में विशेषकर गांवों और कस्बों में खेतों के आसपास, सड़कों के किनारे, नालों के किनारों पर बहुतायत से छत्ते की तरह भूमि पर फैला हुआ मिलता है।

कचरों के ढेर के आसपास भी यह अपने आप उग आता है। इसका पौधा टेढ़ी-मेढ़ी शाखाओं, छोटे-छोटे कांटों से युक्त 5-6 फुट के घेरे में फैलता है। पौधे पर कांटों की संख्या इतनी अधिक होती है कि पौधे को हाथ लगाने में भी कांटे चुभने का भय होता है। लगभग आधा इंच लंबे कांटे दिखने में पीले, चमकदार होते हैं। पत्ते खंडित, डिम्बाकृति, टेढ़ी-मेढ़ी आकृति के 4-5 इंच लंबे और 2-3 इंच चौड़े होते हैं। पुष्प गुच्छों में, छोटे-छोटे, नीले, बैंगनी या जामुनी रंग के लगते हैं। फल लगभग पौन इंच व्यास के लगते हैं।

ये कच्ची हालत में हरे रंग के, सफेद धारियों से युक्त और पक्की अवस्था में पीले रंग के, हरी धारियों से युक्त होते हैं। बैंगन के समान इसके बीज अनेक संख्या में छोटे और चिकने निकलते हैं। भटकटैया दो प्रकार की मिलती है – पहली छोटी कटेरी और दूसरी बड़ी कटेरी। यद्यपि दोनों के गुणों में समानता मिलती है, फिर भी औषधीय प्रयोग के लिए छोटी कटेरी, यानी भटकटैया का ही प्रयोग अधिक किया जाता है। फूलों के रंग भेद से भटकटैया नीले रंग के अलावा सफेद पुष्प वाली भी मिलती है।

यहा पर आप यह जानेंगे –

भटकटैया से घरेलु उपचार

 1. फोड़े-फुसी का ईलाज भटकटैया से Phode- Funsi Ka ilage Bhatkatiye Se

2. कुकर खांसी का ईलाज भटकटैया से Kukker Cough

3. स्तनों का ढीलापन के लिए उपयोगी Flaccidity Of The Breasts

4. दंतशूल में  Dantshool Me Istemal Kare Bhatkatiya

5. पेशाब की रुकावट हो तो भटकटैया अपनाये Pesab Ki Rukavat Me

6. नकसीर की शिकायत में भटकटैया Nakshir Ki Sikayet Me Bhatkatiya

7. दमा के लिए भटकटैया Dema Ke Liye Bhatkatiya

8. मिर्गी का दोरा में लाभ भटकटैया से  Mirgi Ka Dora Me Labh Bhatktiya Se

9. नपुंसकता को दूर करने में सहायक  भटकटैया Napusangta Ko Dur Karne Me Sahayek Bhatkatiya

10. मूत्राशय की पथरी के लिए  भटकटैया Mutrasye Ki Pathri Ke Liye  Bhatkatiya

11. आमवात में भटकटैया का सेवन Aamvaat Me Bhatkatiya Ka Sevan

भटकटैया के विभिन्न भाषाओं में नाम (Bhatkatiya Ke Name)

  1. संस्कृत (Bhatkatiya In Sanskrit) – कण्टकारी।
  2. हिंदी (Bhatkatiya In Hindi) – भटकटैया, छोटी कटेरी।
  3. मराठी (bhatkatiya In Marathi) – भुईरिंगणी।
  4. गुजराती (Bhatkatiya In Gujarati) – भीयरींगणी।
  5. बंगाली (Bhatkatiya In Bangali) – कण्टकारी।
  6. अंग्रेज़ी (Bhatkatiya In English) – यलो बरीड नाइट शेड (Yellow Barried Night Shade)
  7. लैटिन (Bhatkatiya In Latin) – सोलेनन जैन्थो कापम (Solanum Xanthocarpum) |

भटकटैया के आयुर्वेदिक गुण(Bhatkatiya K Ayurvedic gun )

आयुर्वेदिक मतानुसार भटकटैया स्वाद में कटु, तिक्त, गुण में हलकी, तीक्ष्ण,

प्रकृति में गर्म, विपाक में कटु, कफ निस्सारक, पाचक, अग्निवर्द्धक, वातशामक होती है। यह दमा, खांसी, ज्वर, कृमि, दांत दर्द, सिर दर्द, मूत्राशय की पथरी नपुंसकता, नकसीर, मिर्गी, उच्च रक्तचाप में गुणकारी है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति के अनुसार भटकटैया दूसरे दर्जे की गर्म और खुश्क होती है। यह पित्त विकार, कफ, खांसी, दमा, पेट दर्द, मंदाग्नि, पेट के अफारे में गुणकारी है।

वैज्ञानिक मतानुसार भटकटैया की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके पंचांग में सोले कार्पिडिन एल्केलाइड पोटेशियम नाइट्रेट और पोटेशियम क्लोराइड अल्प मात्रा में पाए जाते हैं। इसका काढ़ा सुजाक में लाभप्रद होता है।

भटकटैया का विभिन्न रोगों में प्रयोग और  घरेलु उपचार Bhatkatiya Ke Gharelu Upchaar

1. फोड़े-फुसी का ईलाज भटकटैया से Phode – Funsi Ka Ilage Bhatkatiye Se Phode – Funsi 

बीजों को महीन पीसकर नारियल के तेल में फेंटें। इसे फोड़े-फुसियों

पर लगाते रहने से कुछ ही दिनों में वे ठीक हो जाएंगे।

2. कुकर खांसी का ईलाज भटकटैया से Kukker CoughBHATKATIYA भटकटैया से ख़ासी का ईलाज

फूलों के मध्य पीले रंग के पुष्प केसर का चूर्ण बनाकर शहद के साथ 800-900 मिली ग्राम मात्रा में, सुबह-शाम देने से सामान्य और कुकर खांसी में लाभ मिलेगा।

3.स्तनों का ढीलापन Flaccidity of the breasts

भटकटैया और अनार की जड़ को समभाग लेकर पीस लें।

पानी में इससे लेप तैयार कर स्तनों पर सुबह-शाम नियमित रूप से मालिश करें, स्तनों में कठोरता आ जाएगी।

4. दंतशूल में Dantshool Me Istemal Kre Bhatkatiya 

भटकटैया के बीजों को चिलम में भरकर जलाएं और उसका धुआं मुंह में खींचकर कुछ क्षण अंदर रोककर छोड़ने से दांत, दाढ़ का दर्द व कृमि आदि नष्ट होकर कष्ट दूर हो जाएगा। भटकटैया के पंचांगों से निर्मित काढ़े से गरारे करने से भी दांत दर्द ठीक हो जाता है।

5. पेशाब की रुकावट हो तो भटकटैया अपनाये Pesab Ki Rukavat Me

पत्तों के रस की एक चम्मच की मात्रा को आधे कप मट्ठे (छाछ) के साथ सुबह-शाम पिलाने से रुकावट दूर होगी।

6. नकसीर  की शिकायत में भटकटैया Nakshir Ki Sikayet Me Bhatkatiya

पत्तों को पीसकर बने लेप को कपाल पर लगाएं और पत्तों का 2-3 बूंद रस नथुनों में टपकाएं।

7. दमा के लिए भटकटैया Dema Ke Liye Bhatkatiya

फलों से निर्मित काढ़े में चुटकी भर सेंधानमक और हींग मिलाकर 6 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करते रहने से दमे में लाभ होगा।

8. मिर्गी  का दोरा में लाभ भटकटैया से  Mirrgi Ka Dora Me Labh Bhatktiya Se

नाक के नथुनों में भटकटैया का दूध 2-3 बूंदें सुबह-शाम टपकाने से लाभ होगा।

9. नपुंसकता को दूर करने में सहायक  भटकटैया Napusangta Ko Dur Krne Me Sahayek Bhatkatiya

भटकटैया के बीजों को पानी के साथ पीसकर लेप बनाएं और शिश्न के ऊपर उससे मालिश करके ऊपर से पान का गरम पता बांध दें। प्रयोग कुछ हफ्ते नियमित करें।

10. मूत्राशय की पथरी के लिए  भटकटैया Mutrasye Ki Pathri Ke Liye  Bhatkatiya

जड़ का चूर्ण आधा चम्मच की मात्रा में 4 चम्मच दही के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्ते सेवन करने से पथरी निकल जाएगी।

11. आमवात में भटकटैया का सेवन Amvaat Me Bhatkatiya Ka Sevan

पत्तों के एक चम्मच रस में 2 काली मिर्चे पीसकर मिला लें। इसकी एक खुराक सुबह-शाम कुछ दिन सेवन करने से लाभ होगा।