Button Mushroom (Agaricus Bisporus) Ki Kheti Kaise Kare – बटन मशरूम की खेती

 बटन मशरूम की उन्नत खेती कैसे करें Button Mushroom (Agaricus Bisporus) Ki Kheti Kaise Kare

आवश्यक स्थान मशरूम की वृद्धि हेतु निश्चित तापमान व ठन्डे स्थान की आवश्यकता होती है । जो अधिक गर्म ना हो । जिस स्थान का तापमान लगभग  20-25 डी० सेग्रेड हो, सर्वोत्तम पाया गया है । मशरूम बनने व वृद्धि करने के लिये 15-18 डी०सेग्रेड तापमान उत्तम रहता है । ‘ऑफ सीजन’ मशरूम उगाने हेतु तापमान नियंत्रित करना पड़ता है । अर्थात् ऐसा उत्तरी भारत के मैदानी भागों में किया जाता है । जहां पर अधिक गर्मी होती है ऐसे स्थानों पर वातानुकूलित स्थान बनाना पड़ता है । लेकिन शुद्ध हवा का होना उत्तम रहता है । कमरे में ताजी हवा का आदान-प्रदान होना चाहिए ।

Button Mushroom (Agaricus Bisporus) Ki Kheti Kaise Kare

 बटन मशरूम हेतु पोषक तत्व युक्त खाद मिश्रण

मशरूम की खेती के लिये विशेष प्रकार से पोषक-तत्वयुक्त मिश्रण जो कम्पोस्ट खाद के रूप में बनाकर उगाया जाता है । यह मिश्रण या कम्पोस्ट बनाने हेतु खुला स्थान जिसमें फर्श पक्का तथा कुछ ढलान वाला हो तो उत्तम रहता है जिससे पानी आवश्यकता से अधिक होने पर बाहर निकल सके । यदि कच्चे स्थान ही उपयोग में लाना हो तो नीचे फर्श के स्थान पर प्लास्टिक चादर (Plastic or Poly Sheet) बिछाकर मिश्रण डालकर या बनाकर मशरूम उगा सकते हैं । मिश्रण ऐसा हो कि जिसमें पोषक-तत्व अवश्य हों जिससे प्राप्त होने वाला मशरूम-शीर्ष स्वस्थ प्राप्त होते हैं । जो दो प्रकार का होता है-मिश्रण खाद इस प्रकार है-

1. प्राकृतिक खाद मिश्रण यह प्राकृतिक खाद होती है जिसमें पशु जैसे घोड़े की लीद के साथ गेहूं, चावल का भूसा, छिलका मिलाते हैं । यही तैयार की हुई खाद कम्पोस्ट कहलाती है । इसी कम्पोस्ट मिश्रण में यदि प्रति टन दो किलो यूरिया अथवा तीन किलो डाई-अमोनियम फास्फेट मिला दिया जाये तो खाद मिश्रण अधिक पोषक-तत्वयुक्त हो जाता है । इसी कम्पोस्ट खाद मिश्रण में यदि मुर्गी की खाद सौ किलो या अधिक (100-120 किलो) प्रति टन मिलाएं तो पोषक की मात्रा और बढ़ जाती है । इस प्रकार से उपलब्ध सभी खाद पदार्थों को मिक्स करके एकत्र कर लेते हैं । तत्पश्चात् लम्बाई में मिश्रण का ढेर या ऊंचाई में रखते हैं । इस ढेर की ऊंचाई एवं चौड़ाई एक मीटर के आसपास रखते हैं तथा लम्बाई की दूरी आवश्यकतानुसार रख सकते हैं । इस प्रकार से क्यारियों की तरह स्थान तैयार हो जाता है । इन तैयार क्यारियों (Beds) में मशरूम के बीज या स्पान लगाये जाते हैं तथा जब मौसम बदलने लगे, मार्च के महीनें में गर्मी बढ़ने लगे तो इन बैडस की पलटाई आरम्भ करके दुबारा से बैड्‌स उसी प्रकार से बनायें । इसी समय खाद मिश्रण में जिप्सम (40-60 किलो) मिला सकते हैं । अगली पलटाई में मौसम बदलने पर मेलाथियोन का प्रयोग 0.2% कम्पोस्ट में करना चाहिए ।

2. कृत्रिम खाद-मिश्रण- इस प्रकार के खाद-मिश्रण को उर्वरक मिश्रण भी कहते हैं । इनमें कम्पोस्ट बनाने हेतु गेहूं का भूसा 1टन जिसमें गेहूं छोटे-छोटे टुकड़े हों अथवा धान का छिलका 80-100 किलो लेते हैं । इसमें अमोनियम सल्फेट या कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट 8-10 किलो, यूरिया 8-10 किलो, म्यूरेट ऑफ पोटाश 8-14 किलो तथा जिप्सम 50-60 किलो लेते हैं । जिसमें मुर्गी का खाद 100-150 किलो तथा सम्भव हो सके तो 20 किलो लाट या शीरा या गुड़ गर्म करके मिलाना चाहिए । तत्पश्चात् इस मिश्रण को पेटियों व बड़ी टोकरियों में भर कर प्रयोग में ला सकते हें । इन पेटियों, टोकरियों को उचित स्थान पर रखकर मशरूम को उगा सकते हैं । इनको लोहे की बनी रेकों (Racks) में रखकर उगाते हैं तथा पानी की उचित मात्रा की भी व्यवस्था रखते हैं । इस प्रकार की उगाने की तकनीक या स्थान को मशरूम क्लचररूम (Mushroom Culture Room) या मशरूम प्रयोगशाला (Mushroom Laboratory) भी कहा जाता है ।

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कृषकों द्वारा प्रयोग की जाने वाली विधि (Method of Using by Farmers)

मिश्रण तैयार करने की यह विधि अधिक प्रचलित है । क्योंकि यह साधारणत: गांव लेबल पर आसान व पुरानी विधि है । इस विधि में सर्वप्रथम गेहूं के भूसे को फर्श पर फैलाकर उसे पानी द्वारा गीला करते हैं । पानी पीने (Water Absorve) के बाद पूर्णत: गीला हो जाता है । इस प्रकार से इस भूसे को एकत्र कर ढेर बना लेते हैं । यह ढेर 3-4 दिन तक पड़ा रहने से गर्म (Heat) हो जाता है, जो काफी गर्म हो जाता है । यहां तक कि तापमान देखने से 60-70 डीसेग्रेड तक मिलता है । इस समय ढेर को पलट दें या खोल दें । ठण्डा हो जाने के पश्चात् फिर से ढेर बनायें । यह पलटाई हर 3-4 दिन में करें । जब तीसरी पलटाई करें तो जिप्सम को भी मिलायें । ऐसा करने से मिश्रण से अमोनिया गैस निकलती है जिसमें बदबू सी होती है । क्योंकि भूसा सड़-गल जाता है । यह गैस पूर्णतः निकल जायेगी तथा यह मिश्रण पूर्णत: 15-20 दिन में तैयार हो जायेगा । इस साधारण विधि को छोटे स्तर व कम पढ़े लिखे कृषक ही अपना पाते हैं ।

मिश्रण की आधुनिक विधि (Modern Method of Mixture)

यह विधि एक आधुनिक विधि है । जिसमें मशरूम-उत्पादक (Mushroom Grower) द्वारा मिश्रण को पाश्चुरीकृत किया जाता है । इस विधि में खर्च तो अधिक आता है लेकिन रोग कीट द्वारा क्षति नहीं हो पाती क्योंकि मिश्रण या कल्चर स्ट्रालाइजेशन होने से जर्म्स नष्ट हो जाते हैं । मिश्रण को 10-12 दिन के अन्तराल पर पलटें जिससे मिश्रण पूर्णत: शुद्ध हो जाये । इस प्रकार से 3-4 बार पलटाई करें तथा अंतिम पलटाई पर जिप्सम मिलायें तथा मिश्रण को पेटियों, टोकरियों में भर कर उपचारित कमरों में एक-दूसरे के ऊपर रेक में रखें तथा बीच में कुछ खाली स्थान भी रखें । मिश्रण में भाप व हवा का प्रभाव भी रहे । कमरों को पूर्ण: साफ रखें तथा गर्मी से कमरे में भाप प्रवाहित करें । अत: रखी पेटियों के मिश्रण का तापमान 6-7 दिन तक 55-60 डी०सेग्रेड बनाये रखें । इसके पश्चात् भाप का बहाव कम कर दें तथा धीरे-धीरे कमरे में ताजी शुद्ध हवा को प्रवाहित करके तापमान को सामान्य पर ले आयें तथा मिश्रण में गन्ध (अमोनिया) नहीं होनी चाहिए । इस विधि को बड़े प्रशिक्षित कृषक ही अपना पाते हैं ।

पेटियों में मिश्रण भरने के पश्चात् मशरूम-रूम में सुविधानुसार इस प्रकार रखते हैं कि दूरी 20-25 सेमी. की अवश्य रहे जिससे पानी छिड़कने, मिट्‌टी डालने तथा मशरूम तैयार होने पर काटने में मुश्किल न हो सके तथा हवा का आदान-प्रदान भी आसानी से हो सके तथा रेक की छत्त से दूरी 1-2 मीटर की रखें ।

पेटियों में बीज की बुवाई (Seed / Span Sowing)

बीज (स्पान) की बुवाई प्रत्येक पेटी में अलग-अलग की जाती है । इस प्रकार से मध्यमाकार की प्रत्येक पेटी में 1 00-150 ग्राम बीज को ऊपरी सतह पर छिड़क देते हैं । ये बीज (स्पान) छोटे-छोटे बाजरे के समान होते हैं तथा इन बोई हुई पेटियों को अखबार या कागज से ढक देते हैं । मशरूम-रूम का तापमान ध्यान में रखते हुए  25-26 डी०सेग्रेड रखना चाहिए । आवश्यकतानुसार दिन में एक-दो बार पानी की नमी बनाने हेतु स्प्रे करें तथा मशरूम कमरे को बन्द रखें । इस प्रक्रिया के द्वारा दो हफ्ते में पेटियों में मिश्रण के ऊपर स्पान वृद्धि कर रूई के समान फंगस जैसा जाल दिखाई देने लगता है तथा कुछ दिन बाद मशरूम का रूप धारण कर लेता है अर्थात् बीज वृद्धि करने लगता है ।

मिट्‌टी-मिश्रण बिछाना (Kaising)

पेटियों में बीज बोने के बाद रूई जैसे फंगस जाल युक्त को ऊपर से ढकने वाले पदार्थ या मिट्‌टी-मिश्रण (Materials) को ही मिट्‌टी-मिश्रण (kaising) कहते हैं । इस मिश्रण में गला-सड़ा पुराना गोबर का खाद तीन भाग एवं एक भाग खेत की मिट्‌टी लेकर उसे हानिकारक जीवाणु से मुक्त करके ही प्रयोग करें । जीवाणु-मुक्त हेतु स्ट्रालाइजेशन करें या 5% का फार्मेलिन घोल बनाकर मिश्रण में भली-भांति मिला लेना चाहिए तथा इस मिश्रण को पोलीथीन सीट से दो-तीन दिन तक ढकें रहें जिससे कोई गन्ध न रहे ।

इस केसिंग पदार्थ को पेटियों में फंगस जालयुक्त मिश्रण के ऊपर हल्की मोटी-परत 2-3 सेमी. की बिछा देते हैं ।

पेटियों की देखभाल (Care of Mushroom House)

मिट्टी-मिश्रण के बिछाने के पश्चात् कमरों (Rooms) का तापमान 20 डी०सेग्रेड पर स्थिर रखें । स्प्रे मशीन से 1-2 बार पानी स्प्रे दिन में अवश्य करें | मशरूम कमरों में नमी जरूर बनाये रखने हेतु दीवारों, फर्श यहां तक कि छत पर पानी का स्प्रे करें । जिससे कमरे का तापमान (Rooms Temprature) 15-20 डी०सेग्रेड के बीच बना रहे तथा साथ ही शुद्ध हवा का प्रवेश भी होने दें । अन्दर अशुद्ध हवा को निकालने हेतु दीवार या गेट में एग्जॉस्ट-फेन (Exest Fan) का भी प्रयोग कर सकते हैं अथवा सुबह-सुबह मेनगेट को भी खोलकर अशुद्ध हवा बाहर तथा शुद्ध हवा अन्दर ले सकते हैं । यदि पेटियों में कोई बीमारी या कीट का प्रकोप दिखाई दे तो तुरन्त पेटी को अलग कर बाहर निकालकर बेवस्टिन या डाइथेन एम-45 का 0.5% का स्प्रे कवकयुक्त बीमारी के लिए करें तथा कीट के प्रकोप होने पर रोगोर, मेलाथियोन का 0.2% का स्प्रे करें । ध्यान रहे कि इन दवाओं के प्रयोग करने के पश्चात् एक हफ्ते के बाद मशरूम को बाजार में भेजें तथा पानी का स्प्रे ज्यादा करके ही भेजें जिससे स्वास्थ्य को हानि न पहुंचाये ।

मशरूम की तुड़ाई या कटाई (Harvesting / Plucking)

पेटियों में मिट्‌टी मिश्रण बिछाने के 15-16 दिन के बाद ऊपर सतह पर आलपिन, छत्तरी के आकार की छोटी-छोटी रचनाएं दिखाई देनी आरम्भ हो जाती हैं । इनका 3-5 दिन के अन्दर आकार बड़े बटन के समान हो जाता है । यही मशरूम को तोड़ने या काटने की सही अवस्था है । जैसे-जैसे मशरूम बढ़ती रहे ठीक उसी उचित आकार पर काटते रहना चाहिए । बड़ी मशरूम होने पर स्वाद बदल जाता है तथा बाजारीय कीमत भी कम मिलती है । इस प्रकार से मशरूम का जड़ का शेष भाग रह जाता है । उसे निकालकर फेंक दें तथा जहां कुछ गड्‌ढा बन जाता है । वहां पर मिट्‌टी मिश्रण डाल दें । इस स्थान पर भी मशरूम फैल जायेगी । इस प्रकार मशरूम 12-15 दिन पर काटनी या तोड़नी चाहिए तथा प्रति पेटी से दो महीने तक यह प्रक्रिया करके मशरूम को निकालकर बाजार भेजते रहें ।

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मशरूम की पैकिंग करना (Packing)

मशरूम को पेटियों में काटकर एकत्र करते हैं तथा साथ करके पोली-बेगस (Poly Bags) में 200 से 250 ग्राम वजन के पैकिट बनाते हैं । यह प्रक्रिया ठन्डे स्थान पर करें जिससे की पोली-बेगस में हवा पैक न हो सके । इस प्रकार से ताजे पैकिटों को शीघ्र ही प्रात: के समय ही सुर्य निकलने से पहले ही बाजार में भेज दें ।

सिंचाई की आवश्यकता (Irrigation)

पेटियों की सिंचाई करना या पानी देना एक मुख्य कृषि क्रिया है क्योंकि मशरूम की खेती नमी एवं तापमान पर ही टिकी हुई है । तापमान प्राकृतिक रूप से नियन्त्रण करना ही पानी से स्प्रे करना है । अर्थात् पानी से मशरूम व कमरे को प्रतिदिन ठण्डा रखना या 20 डी०सेग्रेड तापमान बनाये रखना पानी या सिंचाई का मुख्य कार्य है । मशरूम पर दिन में 2-3 बार स्प्रे करना आवश्यक है जिससे मशरूम की वृद्धि अच्छी हो सके ।

उपज (Yield)

मशरूम की उपज सभी कृषि-क्रियाओं तथा तकनीकों को ध्यान में रखते हुए 2-2.5 किलो प्रति पेटी उपज प्राप्त की जाती है । लेकिन उचित व्यवस्था होने पर 3-4 किलो प्रति पेटी उपज प्राप्त की जा सकती है ।