धाय के फायदे (हिंदी में) Dhay Ke Fayde-In Hindi

धाय के फायदे (हिंदी में) Dhay Ke Fayde In Hindi

धाय के देहरादून के जंगलों में बहुतायत में मिलते हैं। इसके अलावा अन्य प्रदेशो मे भी पाए जाते है इसका वृक्ष 6 से 12 फिट ऊंचा, संघन, फैली हुई लंबी  शाखाओं से युक्त होता है। इसकी शाखाओं और पत्तियों पर विशेष प्रकार के काले-काले बिंदुओं का जमघट होता है। लाल, भूरे रंग की छाल पतले-पतले टुकड़ों में गिरती रहती है।

पत्ते 2 से 4 इंच लंबे, नोकदार, भालाकार, ज्यादातर कतारों में, एक दूसरे के सामने लगते हैं। पुष्प एक इंच से भी छोटे, चमकीले लाल रंग के गुच्छों में फूलते हैं। फल पतले, अंडाकार लगते हैं, जिनमें से चिकने, भूरे रंग के छोटे-छोटे बीज निकलते हैं। पुष्पों की बहार जनवरी से अप्रैल के बीच और फलों की बहार अप्रैल से मई में आती है। वृक्ष जब फूलों से लद जाता है, तब पुराने पते झड़कर नए पते निकलने लगते हैं।

इसके बारे में ये जाने –

  1. अतिसार, प्रवाहिका में धाय का सेवन  Atisaar ,Pravahika Me Dhay Ka Sevan
  2. रक्तस्राव में धाय का सेवन Raktstraav Me Dhay
  3. पित्त ज्वर में धाय Pit Zwar Me Dhay
  4. दंत रोगों में धाय से उपाय  Dant Rogo Me Dhay Se Upaay
  5. बच्चों के दांत निकलने के समय धाय का सेवन Childreen Ke Teeth Niklne Ke Samye Dhay Ka Sevan
  6. दाह होने पर धाय Daah Hone Per Dhay
  7. आग से जले घाव पर लगाये धाय Aag Se Jale Ghaaw Per Lagaay Dhay
  8. प्रदर में धाय का सेवन Prader Me Dhay Ka Sevan
  9. गर्भधारण हे:तु धाय का सेवन करे Grabhdharan Hetu Dhay Ka Sevan
  10. प्रमेह में धाय का सेवन Pramay Me Dhay Ka Sevan
  11. रक्तपित्त में धाय का सेवन  Raktpit Me Dhay Ka Sevan
  12. नासूर का ईलाज धाय से Naasur Ka Illaj Dhay Se

धाय के विभिन्न भाषाओं में नाम Name in different languages ​​of Dhay

  • संस्कृत (Dhay In Sanskrit) – घातकी।
  • हिंदी (Dhay In Hindi) – धाय।
  • मराठी (Dhay In Marathi) – धायटी।
  • गुजराती (Dhay In Gujarati) – धावड़ी।
  • बंगाली (Dhay In Bangali) – धाई।
  • अंग्रेजी (Dhay In English) – फायर फ्लेम बुश (Fire Flame Bush)।
  • लैटिन (Dhay In Latin) – बुडफोर्डिया फुर्टिकोसा ।

धाय के  गुण Dhay Ke Gun

आयुर्वेदिक मतानुसार धाय रस में कटु, कषाय, गुण में लघु, तासीर में शीतल, विलाप मे कटु, कफ – पित्तसामक, उत्तेजक, रक्त स्तंभक, व्रणरोपक, विषहरहोता है । यह प्रवाहिका, अतिसार, ज्वर,रक्तपित्त , रक्त प्रदर, दंतरोग, प्रमेह, ग्रभाधरणर्थ उपयोगी  है।

यूनानी मतानुसार धाय की तासीर समशीतोष्ण होती है। यह पेट के कीड़े नष्ट करने, नासूर, खूनी बवासीर, श्वेत प्रदर में बहुत लाभप्रद होता है।

वैज्ञानिक मतानुसार धाय की रासायनिक बनावट का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसके पुष्पों में टैनिन 24 प्रतिशत और शर्करा 11.8 प्रतिशत, पतियों में 12 से 20 प्रतिशत तक टैनिन एवं लसोन नामक रंजक पदार्थ पाया जाता है। छाल में टैनिन का प्रतिशत 20 से 27 तक होता है। पुष्पों से प्राप्त लाल रंग रेशम रंगने के काम में लिया जाता है। इसके तने से अल्प मात्रा में गोंद भी प्राप्त होता है।

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धाय के हानिकारक प्रभाव Dhay Ke Harmful Effects

निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन करने से कृमि की शिकायत पैदा हो सकती है।

धाय के विभिन्न रोगों में प्रयोग और घरेलू नुस्खे Dhay Ke Vibhinn Rogo Me Prayog Aur Gharelu Nuskhe

1. अतिसार, प्रवाहिका में धाय का सेवन  Atisaar ,Pravahika Me Dhay Ka Sevan :

धाय के पुष्प का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में 2 चम्मच शहद या एक कप छाछ के साथ दिन में 3 बार सेवन कराएं।

2. रक्तस्राव में धाय का सेवन Raktsraav Me Dhay :

खूनी बवासीर, रक्त प्रदर या किसी अन्य प्रकार के रक्तस्राक को रोकने के लिए एक चम्मच पुष्प के चूर्ण दो चम्मच शहद के साथ सेवन करें।

3. पित्त ज्वर में धाय Pitt Jwar Me Dhay :

धाय के पुष्प का एक चम्मच चूर्ण गुलकद के साथ सुबह-शाम लें। इससे जल्द आराम मिल जायेगा |

4. दंत रोगों में धाय से उपाय  Dant Rogo Me Dhay Se Upaay :

धाय के पते और फूल समभाग मिलाकर काढ़ा तैयार करें। इससे दिन में 2-3 बार गरारे करने से समस्त दंत विकारों में लाभ मिलता है।

5. बच्चों के दांत निकलने के समय धाय का सेवन Bachco Ke Teeth Nikalne Ke Samay Dhay Ka Sevan :

धाय के पुष्प, पिप्पली और आंवले का चूर्ण समभाग लेकर महीन चूर्ण बनाएं। इसे शहद में मिलाकर रोजाना सुबह-शबम मसूड़ों पर मलते रहने से बच्चों के दांत आते समय के कष्ट दूर होंगे और दांत भी सरलता से निकल जाएंगे।

6. दाह होने पर धाय Daah Hone Per Dhay :

शरीर के किसी भी अंग में हो रही बाह्य जलन को दूर करने के लिए धाय के पुष्पों को गुलाब जल में पीसकर बने लेप को लगाएं।

7. आग से जले घाव पर लगाये धाय Aag Se Jale Ghaav Per Lagaay Dhay :

धाय के पुष्प चूर्ण को नारियल के तेल में फेंटकर घाव पर लगाते रहने से जलन, दर्द कम होगा और घाव शीघ्र भरेगा।

8. प्रदर में धाय का सेवन Prader Me Dhay Ka Sevan :

धाय के पुष्प का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में बराबर की मिस्री मिलाकर नियमित रूप से सुबह-शाम कुछ हफ्ते सेवन करें।

9. गर्भधारण हेतु धाय का सेवन करे Grabhdharan Hetu Dhay Ka Sevan :

नीलकमल का चूर्ण और धाय के पुष्प का चूर्ण समभाग मिलाकर ऋतुकाल प्रारंभ होने के दिन से 5 दिन तक शहद के साथ सुबह-शाम नियमित सेवन कराने से गर्भधारण होता है। प्रयोग असफल होने पर अगले ऋतुकाल से पुनः दोहराएं।

10. प्रमेह में धाय का सेवन Pramay Me Dhay Ka Sevan :

धाय के पुष्पों का चूर्ण, पठानी लोध्र और चंदन सभी समभाग पीसकर एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार शहद के साथ कुछ हफ्ते तक सेवनय कराएं।

11. रक्तपित्त में धाय का सेवन  Raktpit Me Dhay Ka Sevan :

दूर्वा रस एक चम्मच की मात्रा में पुष्प के एक चम्मच चूर्ण के साथ सेवन कराने से बहुत लाभ मिलता है।

12. नासूर का ईलाज धाय से Naasur Ka Illaj Dhay Se :

अलसी के तेल में धाय के पुष्प चूर्ण को फेंटकर अल्प मात्रा में शहद मिलाकर रोजाना नासूर में लगाते रहने से वह ठीक होगा।