फतेहपुर सीकरी का इतिहास Fatehpur Sikri History In Hindi

फतेहपुर सीकरी का इतिहास Fatehpur Sikri History In Hindi

फतेहपुर सीकरी मुसलमानों का पवित्र धार्मिक स्थल है और यहां हर साल उर्स का मेला लगता है। यह स्थान आगरा से मात्र 37 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहले यहां प्रसिद्ध सूफी संत शेख सलीम चिश्ती की कुटी थी। उस समय शहंशाह अकबर की राजधानी आगरा हुआ करती थी। अकबर की कोई संतान नहीं थी। उत्तराधिकारी न होने के कारण अकबर बहुत चिन्तित था। संत शेख सलीम चिश्ती के आर्शवाद से अकबर को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम सलीम रखा गया। बाद में यही सलीम बादशाह जहांगीर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

फतेहपुर सीकरी में सन् 1559 में अकबर ने एक नगर बसाया। किला और कई महल बनवाए और अपनी राजधानी आगरा से हटाकर फतेहपुर सीकरी बना दी। फिर शहंशाह पूरे वैभव के साथ यहां रहने लगे। बाद में एक विशाल जामा मस्जिद का निर्माण करवाया। वास्तु शिल्प में यह मस्जिद पूरी दुनिया में सर्वोत्तम है।

इसी मस्जिद में सफेद संगमरमर से बना संत शेख चिश्ती का मकबरा है। मकबरे में उच्चकोटि की नक्काशी और गया है। कब्र के ऊपर शीशम की लकड़ी  का छत्र है। यह मकबरा मुसलमानों की अत्यधिक श्रद्धा का केन्द्र है। हर साल उर्स के मेले पर यहां काफी दूर-दूर से मुसलमान आते हैं। । फतेहपुर सीकरी लगातार 16 वर्ष तक अकबर की राजधानी बनी रही।

1685 में पानी की समस्या के करण अकबर ने इसे छोड़कर पुन: अगरा को अपनी राजधानी बनाया | अकबर के फतेहपुर सीकरी छोड़ने के बाद से ही यह नगर धीरे-धीरे उजड़ता चला गया और इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह गया। लेकिन आज भी यहां शाही महल, स्मारक, फतेहपुर सीकरी का तुलन्द दरवाजा मस्जिद, मकबरे, किला आदि उस जमाने की याद ताजा कर देते हैं, जिनमें नौबतखाना, टकसाल और खजाना, दीवाने-आम, दीवाने-खास, पचीसी कोर्ट, पंचमहल, जोधाबाई का महल, हवा महल, बीरबल संत शेख सलीम चिश्ती का मकबरा आदि ऐतिहासिक स्मारक हैं।