हिमाचल प्रदेश और यहाँ के दर्शनीय धार्मिक स्थल

हिमाचल प्रदेश देश का एक छोटा सा पर्वतीय राज्य है। कभी यह संयुक्त पंजाब का ही एक हिस्सा था। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य बहुत ही सुन्दर व दर्शनीय है। यहां शिमला, कुल्लु, मनाली व धर्मशाला जैसे कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें देखने के लिए प्रत्येक वर्ष लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हिमाचल प्रदेश के लाहुल व स्पीति क्षेत्र में तो साल में अधिकतर समय भारी हिमपात होता है। शिमला, मनाली व धर्मशाला में भी सर्दियों में काफी बर्फ गिरती है। यहां चीड़ व देवदार के हरे-भरे जंगल भी हैं। कुल मिलाकर हिमाचल प्रदेश एक ऐसा राज्य है जो पर्यटकों विशेषकर विदेशी पर्यटकों की अपनी ओर खींचता है।

कुल्लू में मनाया जाने वाला दशहरा विदेशी पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। हिमाचल प्रदेश के लोग बहुत धार्मिक प्रवृति के हैं। यहां लकड़ी से बने हजारों साल पुराने मंदिर हैं जिनकी वास्तुकला देखते ही बनती है। हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि व बागवानी पर निर्भर है। यहां सेब, नाशपाती, खुमानी व अन्य फलों के हजारों बगीचे हैं। यहां से बड़ी मात्रा में फलों को बाहर भेजा जाता है। फलों के मुरब्बे बनाकर व उन्हें डिब्बाबंद करके विदेशों में उसका निर्यात भी होता है। यहां के लोग बहुत अच्छी नस्ल की भेड़ें भी पालते हैं, जिनके बालों से बने हुए गर्म स्वेटर व शालें देश-विदेश में बहुत प्रसिद्ध हैं।

ज्वाला देवी जी का मन्दिर हिमाचल प्रदेश jwala devi temple history in hindi

हिमाचल प्रदेश का पर्वतीय जिला कांगड़ा अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए तो प्रसिद्ध है ही, धार्मिक दृष्टि से भी इस स्थान का काफी महत्व है। यहां हिन्दुओं के कई बड़े मन्दिर हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का हमेशा तांता लगा रहता है। सम्पूर्ण भारत में फैले 51 शक्तिपीठों में से इस ज्वाला जी का कई  कारणों से विशेष धार्मिक महत्व है।

ज्वाला जी का मंदिर पंजाब राज्य में होशियारपुर जिले के गोपीपुरा डेरा नामक स्थान से लगभग 20 कि.मी. की दूरी स्थित है। यहां पहुंचने का सबसे होते हुए ज्वाला जी पहुंचना। ज्वालाजी को घूमा देवी का स्थान भी कहते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब शिवजी सती के मृत-शरीर से आसक्त हो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का विचरण कर रहे थे तब भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर धर्म संचालन हेतु शिवजी की आसक्ति को भंग करने के लिए सुदर्शन चक्र द्वारा सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। हिमाचल प्रदेश के जिस स्थल पर सती की जिहूवा गिरी थी, आज वहां यह मंदिर स्थित है। कहते हैं कि इस मंदिर में एक भव्य ज्योति अपने आप प्रज्वलित रहती है।

यहां प्राय: वर्ष भर ही तीर्थ यात्रियों का तांता लगा रहता है। लोगों की  मान्यता है कि यहां की तीर्थयात्रा करने  से उनकी मन-मांगी मुरादें पूरी होती हैं। इस स्थान से एक दिलचस्प ऐतिहासिक  घटना भी जुड़ी है। यह घटना मुगल सम्राट अकबर से सम्बन्धित है, जिन्हें अन्य धर्मों के प्रति अपने झुकाव के लिए जाना जाता है। जब उसे ज्वाला जी से जुड़ी पौराणिक कथा की बातें बताई गई और कहा गया कि आज भी वहां ज्योतियां अपने आप ही प्रज्वलित रहती हैं तो वह इस चमत्कार से काफी प्रभावित हुआ और उसने इस स्थल की यात्रा करने का निश्चय किया | अकबर ने ज्वाला जी के लिए सवा मन भारी सोने का एक छत्र भी बनवाया और दिल्ली से ज्वाला जी तक नंगे पांव गया। अन्य शक्तिपीठों की ही तरह यहां भी हमेशा नवरात्रों में विशेष भीड़ जुटती है।

धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश भारत का दर्शनीय स्थल

धर्मशाला तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान है. वह समय-समय पर यहां आकर अपने अनुयायियों को बौद्ध धर्म का प्रवचन देते रहते हैं. जिसे सुनने के लिए भारत ही नहीं सारे विश्व के बौद्ध अनुयाई यहां आते हैं.

तिब्बत में चीनी आक्रमण और कब्जे के बाद दलाई लामा तिब्बत छोड़कर धर्मशाला में आकर रहने लगे थे. वह तथा उनके अनुयाई यहां रहते हुए तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं. यह विश्व का सबसे बड़ा तिब्बतियन कल्चरल सेंटर है. यहां तिब्बती बौद्ध धर्म का एक बहुत बड़ा संग्रहालय भी है, जिसमें बौद्ध धर्म पर कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियां संग्रहित हैं. यह पांडुलिपियां आज से हजारों वर्ष पहले भारत से तिब्बत ले जाई गई थी. जब दलाई लामा तिब्बत छोड़कर यहां आए तो उन्हें अपने साथ लेकर आए.

बौद्ध धर्म का एक प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ धर्मशाला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले का एक सुंदर स्थान भी है. यह समुद्र तल से 4100 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. जब 1846 ईस्वी में अंग्रेजों ने सिख्यों से युद्ध के बाद कांगड़ा पर अधिकार कर लिया, तो उन्हें एक ऐसे उपयुक्त पहाड़ी स्थल की तलाश थी जहां गर्मी के दिनों में कुछ समय के लिए रहा जा सके. इसलिए उन्होंने 1849 ईस्वी में इस जगह का विकास आरंभ किया. उस समय यहां एक पुरानी धर्मशाला थी, जिसके नाम पर इस जगह का नाम धर्मशाला पड़ गया. भाग्सू धर्मशाला से बहुत ऊंचाई पर स्थित है, भागसू एक पूजा स्थल है. लोकश्रुति के अनुसार यहां शिव और वीर भागसू की एक साथ पूजा होती है.

भागसू के रास्ते में कई सुंदर जलप्रपात पड़ते हैं. भागसू से आगे 10000 फुट की ऊंचाई पर करेरी सरोवर नामक एक दर्शनीय स्थल भी है.