अयोध्या नगरी का इतिहास और दर्शनीय स्थल History of Ayodhya in Hindi

भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में भगवान राम के रूप में अयोध्या में जन्म लिया था। इसलिए हिन्दुओं के लिए यह विशेष धार्मिक महत्व का स्थान है। कभी अयोध्या को साकेत या अवध के नाम से भी जाना जाता था। जैनियों के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म भी अयोध्या में ही हुआ था। अयोध्या की दूरी दिल्ली से 600 कि.मी., लखनऊ से 135 कि.मी. है। यहां पहुंचने के लिए बस तथा रेलों की अच्छी व्यवस्था है। लाखों वर्ष पूर्व अयोध्या में वैवस्वत मनु नामक राजा हुए, जिनकी 64वीं पीढ़ी में दशरथ के पुत्र के रूप में भगवान राम ने जन्म लिया। मनु, इक्ष्वाकु, भगीरथ, रघु, दलीप, हरिश्चन्द्र, राम जैसे सूर्यवंशी राजाओं की राजधानी होने का गौरव अयोध्या को जाता है।

सरयू नदी अयोध्या से होकर गुजरती है। मान्यता है कि राजा इक्ष्वाकु के गुरु, वशिष्ट इस नदी को अयोध्या में लाए थे। सरयू नदी मानसरोवर से निकलती है। सरयू नदी का महात्म्य गंगा-यमुना के बराबर है। सृष्टि की रचना करने से पूर्व ब्रह्मा जी ने विचार किया कि बिना तप किए मैं सृष्टि की रचना नहीं कर पाऊंगा। इसलिए उन्होंने भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा-अर्चना व ध्यान किया। उनकी भक्ति से अत्यधिक प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और प्रेमवश नेत्रों में आंसू भर लाए। उन आंसुओं को ब्रह्माजी ने अपने कमंडल में रख लिया और उनको सुरक्षित रखने के लिए मानसिक सरोवर का निर्माण किया, जिसका रूप बढ़कर मानसरोवर हुआ।

उसके बाद अयोध्या में वैवस्वत नाम के राजा हुए जिनके घर इक्ष्वाकु ने जन्म लिया। नगर में कोई नदी न होने कारण इक्ष्वाकु ने अपने कुलगुरु वशिष्ट की एक नदी की लाने की याचना वशिष्ठ जी ने अपने पिता ब्रह्मा जी को कर प्रसन्न किया और सरयू नदी को अयोध्या में लाने का अनुरोध किया। तब ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा को सरयू नदी मानसरोवर से निकलकर अयोध्या में आई। यह नदी दक्षिण को छोड़ तीन तरफ से अयोध्या को घेरती है। श्रद्धालु सर्व प्रथम इसमें स्नान करते हैं। नहाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। नहाने के बाद गोदान करने की प्रथा है। सरयू के किनारे ही स्वर्गद्वार घाट है। कहा जाता है कि यहां स्नान, दान व पूजा-अर्चना करने रो सीधे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

स्वर्ग द्वार घाट पर ही द्वादश ज्योतिर्लिगों में से एक नागेश्वर नाथ मंदिर है। इस शिवलिंग की स्थापना भगवान राम के पुत्र महाराज कुश ने की थी। सरयू नदी में पश्चिम की और घाटों और मंदिरों का समूह है। जिसमें लक्ष्मण घाट, राम घाट, दशरथ घाट, भरत घाट, शत्रुघ्न घाट, मांडवी घाट, अहिल्या घाट, सुमित्रा घाट, उर्मिला घाट, सीता घाट प्रमुख हैं। इन धाटों के उत्तर की ओर लक्ष्मण किला है। कहते हैं कि लक्ष्मण किला शेषावतार लक्ष्मण का बैठक खाना था। लक्ष्मण घाट से लक्ष्मण जी ने स्वर्ग को प्रस्थान किया था ।

लक्ष्मण घाट पर सहस्रधारा नामक दिव्य स्थल है और यहीं पर लक्ष्मण जी का मंदिर है। इसी मंदिर के बिल्कुल पास में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का मंदिर है। अहिल्याबाई घाट पर श्री गंगानाथ जी का मंदिर है। कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण वध से पापमुक्ति के लिए जो अश्वमेध यज्ञ किया था वह इसी घाट पर किया गया था |

वासुदेव घाट के बारे में यह मान्यता है कि प्रथम महाप्रलय में आदि पुरुष मनु ने यहीं पर मत्स्य भगवान के दर्शन किए थे। इनके अलावा इन घाटों पर लक्ष्मीनारायण मंदिर, उदासीन मंदिर, अवध बिहारी मंदिर, महन्त श्री रामदास जी की समाधि, राम-भरत मिलाप मंदिर, राम जन्म भूमि मंदिर, राम कञ्चहरी, चार धाम मंदिर, हनुमान मंदिर आदि कई मंदिर हैं।

इसके अतिरिक्त अनेक महत्वपूर्ण पौराणिक भवन भी हैं। जैसे- वाल्मीकि रामायण भवन, दशरथ महल, लव-कुश आनन्द भवन, इच्छा भवन आदि हैं। अयोध्या में और भी कई स्थान देखने योग्य हैं जिनका गहरा धार्मिक महत्व है।

यहां साधुओं के अखाड़े भी प्रसिद्ध हैं। कई छावनियां हैं जिसमें सैकड़ों-सैकड़ों साधु गुरु–शिष्य परम्परा के साथ रहते हैं। यहां नि:शुल्क भोजन की भी व्यवस्था है।

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