राष्ट्रीय खेल हॉकी पर निबंध Short Essay On National Game Hockey In Hindi

राष्ट्रीय खेल हॉकी पर निबंध Short Essay On National Game Hockey In Hindi Language

Short Essay On National Game Hockey

भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी विश्व के लोकप्रिय खेलों में से एक है | इसकी शुरुआत कब हुई, यह तो निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता किन्तु ऐतिहासिक साक्ष्यों से सैकड़ों वर्ष पहले भी इस प्रकार का खेल होने के प्रमाण मिलते हैं | आधुनिक हॉकी खेलों का जन्मदाता इंग्लैंड को माना जाता है | भारत में भी आधुनिक हॉकी की शुरुआत का श्रेय अंग्रेजों को ही जाता है | हॉकी के अन्तर्राष्ट्रीय मैचों की शुरुआत 19वीं शताब्दी में हुई थी | इसके बाद बीसवीं शताब्दी में 1924 ई. में अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी संघ की स्थापना हुई | विश्व के सबसे बड़े अन्तर्राष्ट्रीय खेल आयोजन ‘ओलंपिक’ के साथ-साथ ‘राष्ट्रमंडल खेल’ एवं ‘एशियाई खेलों’ में भी हॉकी को शामिल किया जाता है | 1974 ई. में पुरुषों के हॉकी विश्वकप की एंव 1974 ई. में महिलाओं के हॉकी विश्व कप की शुरुआत हुई | न्यूनतम निर्धारित नियत समय में परिणाम देने में सक्षम होने के कारण ही इस खेल ने मुझे सदैव आकर्षित किया है |

हॉकी मैदान में खेला जाने वाला खेल है | बर्फीले क्षेत्रों में बर्फ के मैदान पर खेली जाने वाली आइस हॉकी भारत में लोकप्रियता अर्जित नहीं कर सकी है | दो दलों के बीच खेले जाने वाले खेल हॉकी में दोनों दलों के 11-11 खिलाड़ी भाग लेते हैं | आजकल हॉकी के मैदान में कृत्रिम घास का प्रयोग भी किया जाने लगा है | इस खेल में दोनों टीमें स्टिक की सहायता से रबड़ या कठोर प्लास्टिक की गेंद को विरोधी टीम के नेट या गोल में डालने का प्रयास करती हैं | यदि विरोधी टीम के नेट में गेंद चली जाती है, तो उसे एक गोल कहा जाता है | जो टीम विपक्षी टीम के विरुद्ध अधिक गोल बनाती है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है | मैच में विभिन्न प्रकार के निर्णय में एवं खेल पर नियंत्रण के लिए मैच रेफरी को तैनात किया जाता है | मैच बराबर रहने की दशा में परिणाम निकालने के लिए व्यवस्था भी है |

राष्ट्रीय खेल हॉकी की बात आते ही तत्काल मेजर ध्यानचंद का स्मरण हो जाता है, जिन्होंने अपने करिश्माई प्रदर्शन से पूरी दुनिया को अचंभित कर खेलों के इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित करवा लिया | हॉकी के मैदान पर जब वह खेलने उतरते थे, तो विरोधी टीम को हराने में देर नहीं लगती थी | उनके बारे में यह कहा जाता है कि वे किसी भी कोण से गोल कर सकते थे | यही कारण है कि सेंटर फॉरवर्ड के रूप में उनकी तेजी और जबरदस्त फुर्ती को देखते हुए उनके जीवनकाल में ही उन्हें ‘हॉकी का जादूगर’ कहा जाने लगा था | उन्होंने इस खेल को नवीन ऊंचाइयां दीं |

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में हुआ था | वे बचपन में अपने मित्रों के साथ पेड़ की डाली की स्टिक और कपड़ों की गेंद बनाकर हॉकी खेला करते थे | 23 वर्ष की उम्र में ध्यानचंद 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में पहली बार भाग ले रही भारतीय हॉकी टीम के सदस्य चुने गए थे | उनके प्रदर्शन के दम पर भारतीय हॉकी टीम ने 3 बार 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक एवं 1936 के बर्लिन ओलंपिक में, स्वर्ण पदक प्राप्त कर राष्ट्र को गौरवान्वित किया था | यह भारतीय हॉकी को उनका अविस्मरणीय योगदान है | ध्यानचंद की उपलब्धियों को देखते हुए ही उन्हें विभिन्न पुरस्कारों एंव सम्मानों से सम्मानित किया गया | 1956 ई. में 51 वर्ष की आयु में जब वे भारतीय सेना के मेजर पद से सेवानिवृत्त हुए, तो उसी वर्ष भारत सरकार ने उन्हें ‘पदमभूषण’ से अलंकृत किया | उनके जन्मदिन 29 अगस्त को ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की गई | मेजर ध्यानचंद के अतिरिक्त धनराज पिल्लै, दिलीप टिर्की, अजितपाल सिंह, असलम शेर खान, परगट सिंह इत्यादि भारत के अन्य प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी रहे हैं |

देश में राष्ट्रीय खेल हॉकी का विकास करने के लिए वर्ष 1925 में अखिल भारतीय हॉकी संघ की स्थापना की गई थी | बात करें ओलंपिक खेलों में भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन की, तो ओलंपिक में अब तक भारत को कुल 18 पदक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 11 पदक अकेले भारतीय हॉकी टीम ने ही हासिल किए हैं | हॉकी में प्राप्त 11 पदकों में से 8 स्वर्ण, 1 रजत एवं 2 कांस्य पदक शामिल हैं | 1928 से लेकर 1956 तक लगातार छ: बार भारत ने ओलंपिक खेलों में हॉकी का स्वर्ण पदक जीतने में सफलता पाई | इसके अतिरिक्त 1964 एंव 1980 में भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया |

हॉकी के विश्वकप में भारत का प्रदर्शन ओलंपिक जैसा नहीं रहा है | द्वितीय हॉकी विश्वकप, 1973 में भारत उपविजेता रहा था एंव केवल एक बार 1975 में यह विजेता रहा है | इसके बाद से अब तक हॉकी विश्वकप में भारत की स्थिति संतोषजनक नहीं रही है | वर्ष 2010 में हॉकी विश्वकप का आयोजन भारत में हुआ था, इसमें भी भारत संतोषजनक प्रदर्शन नहीं कर सका | एशियन गेम्स में 1966 एंव 1998 में अर्थात कुल दो बार भारत ने स्वर्ण पदक प्राप्त किया है तथा अब तक कुल 9 बार इसने इसमें रजत पदक प्राप्त करने में कामयाबी पाई है | इसके अतिरिक्त दो बार कांस्य पदक भी भारतीय हॉकी टीम अपने नाम कर चुकी है |

राष्ट्रीय खेल होने के बाद भी 70 के दशक के बाद से भारतीय हॉकी में लगातार गिरावट देखने को मिली है | यह कटु सत्य है कि जिस भारतीय हॉकी टीम की ओलंपिक में कभी तूती बोलती थी, वही टीम वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी नहीं कर पाई | हालांकि राष्ट्रमंडल खेल 2010 में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा था | खैर, पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिला हॉकी टीम ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशेष पहचान कायम करने में सफलता पाई है, किन्तु पुरुषों की हॉकी टीम के प्रदर्शन में निरंतर गिरावट आना चिंता का विषय है | विशेषज्ञों का कहना है कि 1970 के दशक के मध्य से हॉकी के मैदान में एस्ट्रो टर्फ अर्थात कृत्रिम घास के प्रयोग के बाद से भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन में गिरावट आने लगी, क्योंकि भारत में ऐसे मैदानों का अभाव था | अब भारत में ऐसे हॉकी के मैदानों के विकास पर जोर दिया जा रहा है |  आशा है आने वाले वर्षों में भारत हॉकी में अपने पुराने गौरव को प्राप्त करने में सफल रहेगा |