कौंच बीज के फायदे हिंदी में Kaunch Beej Ke Fayde In Hindi

आइये जानते हैं कौंच बीज के फायदे हिंदी में Kaunch Beej Ke Fayde In Hindi

हमारे देश के उष्ण स्थानों पर कौंच की बेल आसानी से मिल जाती है | यह लता जाति की वनौषधि वर्षा ऋतु में उतपन्न होकर सितम्बर-नवम्बर में फूलती हैं और जनवरी-अप्रैल तक फलती है | इसकी बेल झारियों और वृक्षों का सहारा लेकर उन पर छा जाती है | बेल अनेक शखाओं वाली और एक वर्षीय होती है | इसके पत्ते 6-9 इंच लम्बे और संयुक्त रूप में तीन पत्तो में होते है |

पुष्प एक से डेढ़ इंच लम्बे, नील या बैंगनी रंग के लगते है | फली 2-4 इंच लम्बी और लगभग आधा इंच चौड़ी होती है | फलियां गुच्छों में लगाती है, जिस पर सुनहरे और बारीक़ रोम ( रुएं ) होते हैं | इन रोमों के शरीर से स्पर्श होने पर तीव्र खुजली होना शुरू हो जाती है |

जिसे खुजलाने पर त्वचा में दाह और शोथ उतपन्न होती हैं | हर फली के अन्दर चमकीले, चिकने, चपटे, अंडाकार, श्वेत श्याम, रक्त की आभायुक्त 5-6 बिज निकलते है | इनका छिलका मजबूत और काफी कड़ा होता है | छिलका हटाने पर निकली सफेद गिरी ही औषधि में प्रयोग की जाती हैं |

यहां पार हम आपको इनके बारे में बतायेंगें –

  1. बिच्छू के दंश पर Bicchu Ke Dans Per
  2. शिश्न शैथिल्यता Shisn Shethilyta
  3. व्रण के लिए Vard Ke Liye
  4. त्वचा की शुन्यता में Skin Problums Me
  5. श्वेत प्रदर में कौंच चूर्ण का सेवन Swath Prder Me Kaunch Churn Ka Sevan
  6. दमा में कौंच का सेवन Dama Me Kaunch Ka Sevan
  7. पेशाब की तकलीफों में कौंच का सेवन  Toilet Problums Me Kaunch Ka Sevan
  8. बाजीकरण के लिए कौंच के सेवन Bajikarn Ke Liye Kaunch ka Sevan
  9. योनी शैथिल्य को दूर करने के लिए कौंच Yoni Shethilye Ko Dur Krne Ke Liye Kaunch
  10. बन्ध्यत्व (बांझपन )  के लिए उपयोगी  कौंच Bandhytv Ke Liye Kaunch
  11. ज्वर आने पर कौंच का सेवन  Fever Ane Pr Kaunch Ka Sevan

कौंच के विभिन्न भाषाओँ में नाम Kaunch Ke Vibheen Bhashao Me Name

  • संस्कृत Kaunch In Sanskrit – कपिकच्छु |
  • हिंदी Kaunch In Hindi – कौंच, केवांच |
  • मराठी Kaunch In Marathi – खाज कुहिली |
  • गुजरती Kaunch In Gujarati – कौंचा |
  • बंगाली Kaunch In Bangali – आलकुशी |
  • अंग्रेजी Kaunch In English – काउहेज प्लांट (Cowhage plant ) |
  • लैटिन Kaunch In Latin – म्युकना प्रुरिता (Mucuna prurita ) |

कौंच के गुण Kaunch Ke Gun

आयुर्वेद के मतानुसार कौंच की गिरी स्वाद में कड़वी, मधुर, तीखी, स्निग्ध, उष्ण प्रकृति, विपाक में मधुर, वीर्येवर्दक, पौष्टिक, बलदायक, पाचक, वात, पित्त, कफ़ व रक्त विकार नाशक होती है | विशेष तौर पर इसमे यौन विकारों को दूर करने की अपूर्व शक्ति होती है | इसके अलावा उत्तेजक, शूल, कमजोरी, मूत्र विकार, ह्रदय रोग, गर्भाशय की कमजोरी, नेत्र ज्योति, वात व्याधि, चेहरे के आकर्षण को बढ़ाने, स्तंभक, शुक्रवध्दर्क, प्रदर, प्रसूता रोग आदि में भी गुणकारी हैं | इसे स्त्री-पुरुष समान रूप से सेवन कर लाभ उठा सकते हैं |

यूनानी मतानुसार कौंच की गिरी तीसरे दर्जे की गर्म होती है | यह विरेचक, कामोधीपक, बिच्छू का विषहर, शुक्रवध्दर्क, स्तम्भन करने वाली तथा ओजप्रद हैं | बवासीर में यह हानिकारक होती है |

वैज्ञानिक मतानुसार कौंच के बीजो का रासायनिक विभेद ज्ञात करने पर इसमें प्रोटीन 25.03 प्रतिशत, आद्रता 9.1 प्रतिसत, रेशे 6.75 प्रतिसत, खनिज पदार्थ 3.95 प्रतिशत और अल्पमात्रा में फास्फोरस, कैल्शियम, लोहा, मैंगनीज, गंधक, ग्लुटाथायोन, ग्लूकोसाइड, लेसिथिन, निकोटिन, गैलिक एसिड, प्रुरियेनिन आदि पाए जाते है | इसके अलावा बिज मज्जा से एक प्रकार का गढ़ा तेल निकलता हैं, जो गहरे भूरे रंग का होता है | कौंच की फली पर लगे रोमो में मुकुनेन ( Mucunain ) नामक तत्व होता है, जिससे हिस्टेमिन त्वचा पर लगाने से निकलता है | इसी कारण खुजली की शिकायत पैदा होती है | इसमें अल्प मात्रा में सिरोतोनिन तत्व भी होता है, जिस कारण पीड़ा का अनुभव होता है |

कौंच का विभिन्न रोगों में प्रयोग और घरेलु  उपचार Kaunch Ka Vibheen Rogo Me Use And Gharelu Upchaar

कौंच के बीजों का कड़ा, मजबूत छिलका उपयोग में लाने से पूर्व अवश्य निकाल लेना चाहिए | आंतरिक प्रयोग के लिए बिज की गिरी का उपयोग श्रेष्ठ होता है | इसके लिए कौंच के बीजों की मात्रा से लगभग चार गुना दूध में डालकर तब तक उबालें, जब तक की छिलका | आसानी से उत्तर न जाए | अच्छी तरह मसलकर छिलके हटाएं और उन्हें नष्ट कर दें | गिरी को छाया में सुखाकर महीन पिस लें और शीशी में बंद करके रखें और प्रयोग में लें |

1. बिच्छू के दंश पर Bicchu Ke Dans Par :

मिट्टी के तेल या पानी में कौंच के बिज की गिरी घिसकर दंश स्थान पर लगाने से जलन, दर्द दूर होता है |

2. शिश्न शैथिल्यता Shishn Shithilta :

कौंच की जड़ को मूत्र में घिसकर बने लेप को शिश्न पर मलने से उसकी निर्बलता दूर होकर पुष्टता में वृधि होती है |

3. व्रण के लिए Vran Ke Liye :

कौंच के पत्तो को पीसकर व्रण पर लेप लगाएं और बांध दें |

4. त्वचा की शुन्यता में Skin Problems Me :

घी में कौंच के रोमों को सावधानी से घोंटकर बने लेप को त्वचा पर लगाएं |

यह भी जाने – स्किन रोगों के लिए जीवा आयुर्वेद

5. श्वेत प्रदर में कौंच चूर्ण का सेवन Safed Prader Me Kaunch Churn Ka Sevan :

कौंच की गिरी का आधा चम्मच चूर्ण एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें |

6. दमा में कौंच का सेवन Dama Me Kaunch Ka Sevan :

शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच, उसमें कौंच की गिरी का आधा चम्मच चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम नियमित सेवन करना गुणकारी होगा |

7. पेशाब की तकलीफों में कौंच का सेवन  Toilet Problems Me Kaunch Ka Sevan :

कौंच की गिरी का आधा चम्मच चूर्ण एक कप पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करें |

8. बाजीकरण के लिए कौंच के सेवन Bajikran Ke Liye Kaunch ka Sevan :

कौंच की गिरी का चूर्ण, सफेद मुसली, विदारी कंद, अश्वगंधा शतावर, मुलेठी, गोखरू सभी चीजों को समान मात्रा में मिलकर चूर्ण बनाएं और एक-एक चम्मच की मात्र में दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ नियमित सेवन करने से नपुंसकता, शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, वीर्य की कमी, उतेजना और स्तम्भन की कमी दूर होगी | पौरुषबल बढ़कर चेहरे पर निखार आता है |

9. योनी शैथिल्य को दूर करने के लिए कौंच Yoni Dhilapan Ko Dur Karne Ke Liye Kaunch :

कौंच की जड़ का काढ़ा बनाकर उससे योनी में डूश करने से योनिशैथिल्यता दूर होगी |

10 .बन्ध्यत्व (बांझपन)  के लिए उपयोगी  कौंच Banjhpan Ke Liye Kaunch :

कौंच की गिरी और मूल का चूर्ण बराबर की मात्रा में मिलाकर एक-एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हप्ते तक सेवन करें |

11. ज्वर आने पर कौंच का सेवन  Fever Aane Par Kaunch Ka Sevan :

जब रोगी ज्वर की अवस्था में प्रलाप करने लगे, तो कौंच की जड़ का काढ़ा एक कप की मात्रा में 2-3 बार पिलाने से शीघ आराम मिलता है |