मोटापा आधुनिक सभ्यता की देन है – क्या आप सहमत हैं ?

चरक सहिंता के अनुसार, मोटा (स्थूल) रहने से दुबला पतला रहना ज्यादा अच्छा है, क्योंकि मोटापे की कोई दवा व इलाज भी नहीं है. यहाँ पर हम जानेगें कि मोटापा कैसे कम करें (Motapa kaise kam kare).

मोटापे से कई भीषण बीमारियां जैसे – उक्त रक्तचाप, हृदयरोग, मस्तिष्क एवं वृक्क रोग, शुगर आदि पैदा हो जाती है, जिससे शरीर अनेक समस्याओं का घर बन जाता है. ऐसा नहीं कि इस रोग में दवा काम नहीं करती अपितु दवा से ज्यादा संयम से लाभ होता है.

मोटापा रोग क्या है

इस रोग का परिचय बताने की अधिक आवश्यकता नहीं है | सामान्य व्यक्ति भी इसको अच्छी तरह जानते हैं. इसलिए मोटापे को आयुर्वेद में मेदो रोग, स्थूलता कहा जाता है. अंग्रेजी में इसे ओबेसिटी (Obesity) कहा जाता है. शरीर में अधिक मज्जा (चर्बी) हो जाने से शरीर भारी, मोटा दिखाई पड़ता है, ऐसे लोगों को आलस्य अधिक तथा किसी भी कार्य को पूरा करने में विलंब होता है. पेट आगे की ओर निकल आता है. प्रायः स्त्रियों के नितंब (कूल्हे) बड़े-बड़े दिखने लगते हैं. इस प्रकार से जब शरीर में मेद धातु ज्यादा बढ़ जाती है तब उसे आयुर्वेद में स्थौल्य या मेदो रोग कहा जाता है.

मोटापा (मेदो रोग) के कारण

यद्यपि मेदो रोग के विभिन्न कारण हैं, तदपि आज कल बड़े शहरों का खान पान रहन सहन भी एक विशेष कारण है; जैसे :-

  1. थाइरॉइड ग्रंथि में विकार उत्पन्न हो जाना.
  2. अधिक सोना या दिन में भी लेटे रहना या ज्यादा समय तक कुर्सी या गद्दी पर बैठे रहना.
  3. मैथुन आदि परिश्रम न करना.
  4. आलस्य, चिंता, क्रोध अधिक होना.
  5. बार बार भोजन या कुछ न कुछ बात खाते रहना.
  6. फास्ट फूड, तैलीय या वसायुक्त भोजन अधिक करना. हाई कैलोरी अधिक पौष्टिक पदार्थों का सेवन.
  7. अनुवांशिक (पैतृक कारणों से माता पिता यदि होते हैं तो बालक भी मोटे हो सकते हैं).
  8. यह रोग प्रायः अमीर या मध्यम वर्गीय परिवारों में अधिक होता है.
  9. स्त्रियों में प्रसव के बाद यह रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती है, क्योंकि आज कल ग्लुकोज आदि चढ़ाने की अधिक परंपरा है.

मोटापा रोग के लक्षण

मेदों मांसाति वृद्धत्वालस्फिक्गुदस्तनः .

अयथोपचयोत्स्हो नरो अति स्थूल उच्यते..

कार्य में अशक्ति, क्षुद्रश्वास, अत्यधिक भूख लगना, मेद उदर और वक्ष में एकत्र होना. स्वेद (पसीना) अधिक आना, दुर्गंध, अल्प मैथुन शक्ति, आयुहानि, उत्साह कम होना, अधिक प्यास, अग्नि मांघ, मेद का समुचित पाचन न होना. शरीर के विभिन्न अंगों के कार्य में बाधा उपस्थित होना. मेदो रोगी सुंदर, सुडौल सामान्य नहीं दिखता.

चिकित्सा :- स्थूल रोगी को भाप स्नान व पंचकर्म चिकित्सा विशेष लाभकारी होती है. स्थौल्य वर्धक कारणों को छोड़ देना चाहिए. संयम शील, परिश्रमी जीवन यापन करना चाहिए.

औषधि व्यवस्था : रोगी का सर्वप्रथम उदर शोधन करना चाहिए. मेद रोगी को भाप स्नान एक दिन छोड़कर अवश्य करना चाहिए. उदर शोधन के पश्चात निम्न औषधि व्यवस्था करनी चाहिए.

अभ्यंग :- रुक्ष ऊष्ण तेल या नारायण तेल की मालिश करें.

औषधि :-

  1. मेदोहर गुग्गुल – 2 गोली, आरोग्य वर्धनी – 2 गोली, वातगंजाकुश रस – 1 गोली;
  2. रात्रि में भोजन के 2 घंटे बाद पंचसकार चूर्ण 2 ग्राम एक दिन छोड़कर पानी दें.
  3. कुमार्यासव – 10 ग्राम और पुनर्नवासव – 10 ग्राम सुबह शाम पानी से दे.
  4. भोजन के बाद लसुनादि बटी या शंखबटी 2 गोली दें.
  5. वृहत्पंचमूलक्वाथ, शहद दिन में दो बार कवोष्ण (गुनगुने) जल से दें.

उपरोक्त औषधि व्यवस्था देने से पूर्व रोगी का वनज कर ले और सप्ताह बाद निरंतर वजन करते रहे. यदि ब्लड प्रेशर लो हो जाए तो कुछ समय के लिए औषधि बंद कर दें. उपरोक्त औषधि व्यवस्था वय, बल रोगानुसार कम या ज्यादा की जा सकती है.

आसन :- प्रणायाम, वज्रासन, सूर्य नमस्कार.

मोटापा और संयम

  1. मांसाहारी है तो चिकन तथा मीट का सेवन पूर्णतः बंद कर दें.
  2. भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स के तत्वों का समावेश कम से कम करें.
  3. मोटापा कम करने के लिए रस्सी कूदना सर्वश्रेष्ठ व्यायाम है.
  4. प्रातः व सायं खुली हवा में अवश्य टहलें.
  5. मोटापा कम करने वाली दवाओं के ही सहारे न रहे. दवा के साथ साथ संयम पर विशेष ध्यान दें.
  6. क्रीम निकले हुए दूध का प्रयोग करें. गर्म पानी में शहद तथा नींबू डालकर पीने से भी वजन कम होने लगता है.
  7. वसा युक्त पदार्थों को त्याग दें तो अच्छा है.
  8. मोटे व्यक्तियों के लिए मदिरापान करना विषपान के समान हैं.
  9. कच्ची सब्जियों एवं सलाद का प्रयोग नियमित करें.
  10. चीनी रहित अनाज का प्रयोग करें. फल का सेवन अधिकाधिक करें.
  11. ताजा भोजन ही ग्रहण करें. फ्रिज में रखे भोजन का प्रयोग न करें.
  12. तले व वसायुक्त पदार्थ न ग्रहण करें.

क्या खाएं

जौ, चना, शालिचावल, मूंग, मसूर, अरहर की दाल, तक्र का प्रयोग, 3 से 4 कि. मि. प्रतिदिन शुद्ध हवा में भ्रमण, परिश्रम युक्त कार्य करना, हल्का व्यायाम.

अपथ्य (परहेज करने वाली चीजें)

नवान्न, गेहूं, उड़द, राजमा, आलू, अरबी, कंद, तले व वसायुक्त पदार्थ, चावल, पेप्सी आदि नेय, मांस-मघ, मछली, शर्करा से बने पदार्थ, आइसक्रीम, चाट आदि शीतल जल से स्नान, दिन में शयन, चिंता, क्रोध आदि.