एकादशी व्रत कथा विधि Ekadashi Vrat Katha Vidhi In Hindi

जो विशेष स्थान नदियों में गंगा जी का है, व्रतों में वही स्थान एकादशी व्रत का है । इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा करते हैं ।
पूज…

Read more एकादशी व्रत कथा विधि Ekadashi Vrat Katha Vidhi In Hindi

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा की विधि इन हिंदी Ganesh Chaturthee Vrat Ki Kathaa Vidhi In Hindi

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को किया जाता है । इस व्रत को माघ, श्रावण, मार्गशीर्ष और भाद्रपद मे…

Read more संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा की विधि इन हिंदी Ganesh Chaturthee Vrat Ki Kathaa Vidhi In Hindi

ओलम्पिक खेलों पर निबंध Essay On Olympic Games And India In Hindi

ओलम्पिक खेलों पर निबंध Essay On Olympic Games And India In Hindi ओलम्पिक विश्व का सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धा आयोजन…

Read more ओलम्पिक खेलों पर निबंध Essay On Olympic Games And India In Hindi

रू 500 और रू 1000 के नोट ख़त्म होने बाद कैसे क्या करें What To Do After Discontinuation of Rs 500 and Rs 1000 Note

दिनांक 8 नवम्बर 2016 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने बहुत बड़ा स्टेप लिया, रू 500 और रू 1000 के नोट को ख़त्म करके | इससे उन्होंने करप्श…

Read more रू 500 और रू 1000 के नोट ख़त्म होने बाद कैसे क्या करें What To Do After Discontinuation of Rs 500 and Rs 1000 Note

क्रिकेट पर निबंध Very Short Essay On Cricket In Hindi

क्रिकेट पर निबंध Very Short Essay On Cricket In Hindi Language शरीर को स्वस्थ रखने की दृष्टि से खेलों का बड़ा महत्त्व है | खेल किस…

Read more क्रिकेट पर निबंध Very Short Essay On Cricket In Hindi

हेलमेट पहनने के फायदे (लाभ) Helmet Pahanane Ke Fayde (Labh)

आप सभी जानते हैं कि हर देश में दोपहिया वाहन चलाने के लिए और बैठने दोनों के लिए हेलमेट जरूरी है | लेकिन अकसर देखा यह जाता है कि लोग…

Read more हेलमेट पहनने के फायदे (लाभ) Helmet Pahanane Ke Fayde (Labh)

राष्ट्रीय खेल हॉकी पर निबंध Short Essay On National Game Hockey In Hindi

राष्ट्रीय खेल हॉकी पर निबंध Short Essay On National Game Hockey In Hindi Language भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी विश्व के लोकप्रिय खेल…

Read more राष्ट्रीय खेल हॉकी पर निबंध Short Essay On National Game Hockey In Hindi

स्वदेश प्रेम पर निबंध Essay On Country Love In Hindi

स्वदेश प्रेम पर निबंध Essay On Country Love In Hindi Language

“जो भरा नहीं है भावों से, बहती जिसमें रसधार नहीं |
वह हृदय नहीं है, पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं ||”

मैथिलीशरण गुप्त की इन काव्य पंक्तियों का अर्थ यह है कि देश-प्रेम के अभाव में मनुष्य जीवित प्राणी नहीं बल्कि पत्थर के ही समान कहा जाएगा | हम जिस देश या समाज में जन्म लेते हैं, उसकी उन्नति में समुचित सहयोग देना हमारा परम कर्त्तव्य बनता है | स्वदेश के प्रति यही कर्त्तव्य-भावना इसके प्रति प्रेम अर्थात स्वदेश-प्रेम या देश-भक्ति का मूल स्रोत है |

कोई भी देश साधारण एवं निष्प्राण भूमि का केवल ऐसा टुकड़ा नहीं होता, जिसे मानचित्र द्वारा दर्शाया जाता है | देश का निर्माण उसकी सीमाओं से नहीं बल्कि उसमें रहने वाले लोगों एवं उनके सांस्कृतिक पहलुओं से होता है | लोग अपनी पृथक संस्कृतिक पहचान एंव अपने जीवन-मूल्यों को बनाए रखने के लिए ही अपने देश की सीमाओं से बंधकर इसके लिए अपने प्राण न्योछावर करने को तत्पर रहते हैं | यही कारण है कि देश-प्रेम की भावना देश की उन्नति का परिचायक होती है |

स्वदेश-प्रेम यद्यपि मन की एक भावना है तथापि इसकी अभिव्यक्ति हमारे क्रिया-कलापों से हो जाती है | देश-प्रेम से ओत-प्रोत व्यक्ति सदा अपने देश के प्रति कर्त्तव्यों के पालन हेतु न केवल तत्पर रहता है, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए अपने प्राण न्योछावर करने से भी पीछे नहीं हटता | सच्चा देशभक्त आवश्यकता पड़ने पर अपना तन, मन, धन सब कुछ समर्पित कर देता है |

स्वतन्त्रता पूर्व के हमारे देश का इतिहास देशभक्तों की वीरतापूर्ण गाथाओं से भरा है | देश की आजादी के लिए सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुखदेव, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे युवा क्रांतिकारियों के बलिदानों को भला कौन भुला सकता है |

किसी भी देश के सर्वांगीण विकास के लिए यह आवश्यक है कि उसके नागरिक स्वदेश-प्रेम की भावना से ओत-प्रोत हों | मुनाफाखोरी, कालाबाजारी, रिश्वतखोरी व भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले लोगों से न केवल देश का विकास अवरुद्ध होता है, बल्कि इसकी आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है, क्योंकि ऐसे लोग पैसों के लिए अपना ईमान ही नहीं, देश बेचने से भी संकोच नहीं करते | कुछ स्वार्थी नेता भी चुनाव जीतने के लिए क्षेत्रवाद, जातिवाद, भाषावाद, इत्यादि को बढ़ावा देते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता एंव अखंडता की भावना को ठेस पहुंचती है तथा देश में वैमनस्य एवं अशांति के वातावरण का निर्माण हो जाता है | हमें ऐसे नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है, जो देश-प्रेम का ढोंग रचते हैं | वास्तव में उनका मकसद देश के हितों को चोट पहुंचाना होता है |

वास्तव में देश-प्रेम की भावना मनुष्य की सर्वश्रेष्ठ भावना है | इसके सामने किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत लाभ का कोई महत्व नहीं होता | यह एक ऐसा पवित्र व सात्विक भाव है, जो मनुष्य को निरंतर त्याग की प्रेरणा देता है | इसीलिए कहा गया है- जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी, अर्थात जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं | मानव की हार्दिक अभिलाषा रहती है कि जिस देश में उसका जन्म हुआ, जहां के अन्न-जल से उसके शरीर का पोषण हुआ एंव जहां के लोगों ने उसे अपना प्रेम एंव सहयोग देकर उसके व्यक्तित्व को निखारा, उसके प्रति अपने कर्त्तव्यों का पालन वह सदा करता रहे | यही कारण है कि मनुष्य जहां रहता है, अनेक कठिनाइयों के बावजूद उसके प्रति उसका मोह कभी खत्म नहीं होता |

देश-प्रेम को किसी विशेष क्षेत्र एंव सीमा में नहीं बांधा जा सकता | हमारे जिस कार्य से देश की उन्नति हो, वही देश-प्रेम की सीमा में आता है | अपने  प्रजातंत्रात्मक देश में, हम अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए ईमानदार एंव देशभक्त जनप्रतिनिधि का चयन कर देश को जाति, संप्रदाय तथा प्रांतीयता की राजनीति से मुफ्त कर इसके विकास में सहयोग कर सकते हैं | जाति-प्रथा, दहेज-प्रथा, अंधविश्वास, छुआछूत इत्यादि कुरीतियां देश के विकास में बाधक हैं | हम इन्हें दूर करने में अपना योगदान कर देश-सेवा का फल प्राप्त कर सकते हैं | अशिक्षा, निर्धनता, बेरोजगारी, व्यभिचार एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़कर हम अपने देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकते हैं | हम समय पर टैक्स का भुगतान कर देश की प्रगति में सहायक हो सकते हैं | इस तरह, किसान, मजदूर, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी, चिकित्सक, सैनिक और अन्य सभी पेशेवर लोगों के साथ-साथ देश के हर नागरिक द्वारा अपने कर्त्तव्यों का समुचित रुप से पालन करना ही सच्ची देशभक्ति है |

नागरिकों में देश-प्रेम का अभाव राष्ट्रीय एकता में सबसे बड़ी बाधा के रूप में कार्य करता है, जबकि राष्ट्र की आंतरिक शांति तथा सुव्यवस्था और बाहरी दुश्मनों से रक्षा के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक है | यदि हम भारतवासी किसी कारणवश छिन्न-भिन्न हो गए, तो हमारी पारस्परिक फूट को देखकर अन्य देश हमारी स्वतन्त्रता को हड़पने का प्रयास करेंगे | इस प्रकार अपनी स्वतन्त्रता की रक्षा एंव राष्ट्र की उन्नति के लिए राष्ट्रीय एकता परम आवश्यक है और राष्ट्रीय एकता बनाए रखना तब ही संभव है जब हम देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों का पालन करेंगे |

यह हमारा कर्त्तव्य है कि सब कुछ न्योछावर कर के भी हम देश के विकास में सहयोग दें, ताकि अनेक राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं का सामना कर रहा हमारा देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे | अंततः हम कह सकते हैं कि देश सर्वोपरि है, अतः इसके मान-सम्मान की रक्षा हर कीमत पर करना देशवासियों का परम कर्त्तव्य है |

मनोरंजन के हाइटेक साधन पर निबंध Essay On Modern Means Of Entertainment In Hindi

मनोरंजन के हाइटेक साधन पर निबंध Essay On Modern Means Of Entertainment In Hindi Language

एक समय था जब मनोरंजन के लिए लोग शिकार खेला करते थे | सभ्यता में विकास के बाद दूसरे खेल लोगों के मनोरंजन के साधन बने | आज भी खेल लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन हैं, किन्तु आजकल खेलों को प्रत्यक्ष रुप से देखने के बजाए किसी इलेक्ट्रानिक माध्यम से इसे देखने वालों की संख्या बढ़ी है | इस समय टेलीविजन, रेडियो तथा इंटरनेट एंव कंप्यूटर मनोरंजन के प्रमुख एंव हाई-टेक साधन हैं | आइए, मनोरंजन के इन हाई-टेक साधनों के बारे में विस्तार से जानते हैं |

टेलीविजन- टेलीविजन आजकल लोगों के मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बन चुका है | इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि टेलीविजन पर हर आयु वर्ग के लोगों के लिए कार्यक्रम मौजूद हैं | गृहणियां कुकिंग सहित सास-बहुओं पर आधारित टी.वी शो देख सकती हैं | बच्चे कार्टून कार्यक्रम सहित तमाम तरह के गीत-संगीत पर आधारित रियलिटी शो देख सकते हैं | पुरुष न्यूज चैनलों के साथ-साथ क्रिकेट मैच का प्रसारण देख सकते हैं | बुजुर्ग लोग समाचारों, धारावाहिकों के अलावा धार्मिक चैनलों पर सत्संग एंव प्रवचन का आनंद ले सकते हैं |

रेडियो– आधुनिक काल में रेडियो मनोरंजन का एक प्रमुख साधन बनकर उभरा है | रेडियो पर गीत-संगीत के अलावा सजीव क्रिकेट कमेंट्री श्रोताओं को आनंदित तो करती ही है, जब से एफ.एम. चैनलों का पदार्पण भारत में हुआ है, रेडियो की उपयोगिता और बढ़ गई है | आजकल हम लोगों को मोबाइल फोन के माध्यम से विभिन्न एफ.एम. स्टेशनों को सुनते देखते हैं | रेडियो मिर्ची, रेड एफ.एम., रेडियो सिटी, रेडियो म्याऊ इत्यादि चर्चित एफ.एम. स्टेशन हैं | ये श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं | आज एफ.एम. प्रसारण दुनिया भर में रेडियो प्रसारण का पसंदीदा माध्यम बन चुका है | इसका एक कारण इससे उच्च गुणवत्ता युक्त स्टीरियोफोनिक आवाज की प्राप्ति भी है | शुरुआत में इस प्रसारण की देश भर में कवरेज केवल 30 प्रतिशत थी, किन्तु अब इसकी कवरेज बढ़कर 60 प्रतिशत से अधिक तक जा पहुंची है |

कंप्यूटर एंव इंटरनेट आधुनिक मनोरंजन के साधनों में कंप्यूटर एंव इंटरनेट का स्थान अग्रणी है | भारतीय युवाओं में इनका प्रयोग तेजी से बढ़ा है | इंटरनेट को तो कोई जादू, तो कोई विज्ञान का चमत्कार तो कोई ज्ञान का सागर कहता है | आप इसे जो भी कहिए किन्तु इस बात में कोई संदेह नहीं कि सूचना-क्रांति की देन यह इंटरनेट न केवल मानव के लिए अति उपयोगी साबित हुआ है बल्कि संचार में गति एवं विविधता के माध्यम से इसने दुनिया को बिल्कुल बदल कर रख दिया है |

आज विश्व के कुल 6.8 अरब से अधिक लोगों में से लगभग 2 अरब लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं | अमेरिका में इंटरनेट से जुड़े लोगों की संख्या सर्वाधिक पूरे विश्व का लगभग 20 प्रतिशत है | भारत में ऐसे लोगों की संख्या 6 करोड़ से अधिक है | इंटरनेट ने सरकार, व्यापार और शिक्षा को नए अवसर दिए हैं | सरकारें अपने प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विभिन्न कर प्रणाली, प्रबंधन और सूचनाओं के प्रसारण जैसे अनेकानेक कार्यों के लिए इंटरनेट का उपयोग करती हैं | कुछ वर्ष पहले तक इंटरनेट व्यापार और वाणिज्य में प्रभावी नहीं था लेकिन आज सभी तरह के विपणन और व्यापारिक लेन-देन इसके माध्यम से संभव हैं | इंटरनेट पर आज पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं, रेडियो के चैनल उपलब्ध हैं और टेलीविजन के लगभग सभी चैनल भी मौजूद हैं | इंटरनेट के माध्यम से मीडिया हाउस ध्वनि और दृश्य दोनों माध्यम के द्वारा ताजातरीन खबरें और मौसम संबंधी जानकारियां हम तक आसानी से पहुंच रही हैं | नेता हो या अभिनेता, विद्यार्थी हो या शिक्षक, पाठक हो या लेखक, वैज्ञानिक हो या चिंतक सबके लिए इंटरनेट उपयोगी साबित हो रहा है |

सिनेमा– बात मनोरंजन के आधुनिक साधनों की हो, या पूर्व साधनों की, यह सिनेमा के बिना अधूरी है | सिनेमा पहले भी लोगों के मनोरंजन का एक शक्तिशाली माध्यम था, आज भी है | आज पारिवारिक एवं हास्य से भरपूर फिल्में दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन कर रही है | एक व्यक्ति तनावपूर्ण वातावरण से निकलने एंव मनोरंजन के लिए सिनेमा का रुख करता है | हालाँकि वर्तमान समय में बहुत-सी फ़िल्में हिंसा एंव अश्लीलता का भौंडा प्रदर्शन भी करती हैं, किन्तु इन जैसी खामियों को दरकिनार कर दें, तो दर्शकों का स्वस्थ मनोरंजन ही करते हैं |

विज्ञापन की दुनिया पर निबंध Essay On World Of Advertisement In Hindi

विज्ञापन की दुनिया पर निबंध Essay On World Of Advertisement In Hindi Language

एक छोटा-सा विज्ञापन क्या नहीं कर सकता, हिट हो जाए तो सामान्य से उत्पाद को आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा सकता है | विज्ञापन की बानगी देखिए | ‘ठंडा मतलब कोकाकोला’ हो या ‘सर उठा के जियो’ अथवा ‘कुछ मीठा हो जाए’ जैसे विज्ञापन सहज ही लोगों की जुबान पर चढ़ गए हैं | यद्यपि, रेडियो या टेलीविजन के प्रसारण के छोटे-से समय या समाचार-पत्रों के छोटे-से हिस्से के द्वारा विज्ञापनों को अपना उद्देश्य पूरा करना पड़ता है, फिर भी इनमें रचनात्मकता देखते ही बनती है | इसमें दो राय नहीं कि मैगी, सॉस एंव साबुन-शैंपू जैसे उत्पादों की बिक्री में वृद्धि का कारण इनके रचनात्मक विज्ञापन ही हैं |

विज्ञापन, उपभोक्ताओं को शिक्षित एंव प्रभावित करने के दृष्टिकोण से निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं की ओर से विचारों, उत्पादों और सेवाओं से संबंधित संदेशों का अव्यक्तिगत संचार है | यह मुद्रित, ऑडियो अथवा वीडियो रूप में हो सकता है | इसके प्रसारण के लिए समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन एंव फिल्मों को माध्यम बनाया जाता है | इनके अतिरिक्त होर्डिंग्स, बिलबोर्ड्स, पोस्टर्स इत्यादि का प्रयोग भी विज्ञापन के लिए किया जाता है | जूते-चप्पल से लेकर लिपस्टिक, पाउडर एंव दूध-दही यानी दुनिया की ऐसी कौन सी चीज है जिसका विज्ञापन किसी न किसी रूप में कहीं प्रसारित या प्रकाशित न होता हो | यहां तक कि विवाह के लिए वर या वधू की तलाश हेतु भी विज्ञापन प्रकाशित एंव प्रसारित होते हैं |

विज्ञापन की विशेषताओं पर गौर करें तो पता चलता है कि ये संदेश के अव्यक्तिगत संचार होते हैं | इनका उद्देश्य वस्तुओं एवं सेवाओं का संवर्द्धन करना होता है | इनके प्रायोजक द्वारा लोगों को वस्तु एंव सेवाओं को खरीदने के लिए प्रेरित करने वाला एक संदेश प्रेषित किया जाता है | इस तरह विज्ञापन संचार का भुगतान किया हुआ एक रुप है | विज्ञापन के उद्देश्य इस प्रकार हैं- यह नए उत्पाद के प्रस्तुतीकरण में सहायक होता है | यह कंपनी के उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में सहायक होता है | यह वर्तमान क्रेताओं को कायम रखता है | यह कंपनी की कीर्ति स्थापित करता है एंव इसमें वृद्धि करता है | यह ब्रांड छवि की रचना कर उसे बढ़ाने में प्रयुक्त होता है | यह व्यक्तिगत विक्रय में सहायक होता है |

विज्ञापन से कई प्रकार के लाभ होते हैं | यह उत्पादों, मूल्यों, गुणवत्ता, बिक्री संबंधी जानकारियों, विक्रय उपरान्त सेवाओं इत्यादि के बारे में उपयोगी सूचनाएं प्राप्त करने में उपभोक्ताओं की मदद करता है | यह नए उत्पादों के प्रस्तुतीकरण, वर्तमान उत्पादों के उपभोक्ताओं को बनाए रखने और नए उपभोक्ताओं को आकर्षित कर अपनी बिक्री बढ़ाने में निर्माताओं की मदद करता है | यह लोगों को अधिक सुविधा, आराम, बेहतर जीवन पद्धति उपलब्ध कराने में सहायक होता है | इन सबके अतिरिक्त विज्ञापन समाचार-पत्र, रेडियो एंव टेलीविजन की आय का प्रमुख स्रोत होता है | यदि सही मात्रा में इन माध्यमों को विज्ञापन न मिले तो इन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | जो समाचार-पत्र हम 3 या 4 रूपये में खरीदते हैं, उसकी छपाई का ही व्यय 10 रूपये से अधिक होता है | फिर प्रश्न उठता है कि हमें कम कीमत पर यह कैसे उपलब्ध हो जाता है | दरअसल, विज्ञापनों से प्राप्त आय से इसकी भरपाई की जाती है | इस तरह स्पष्ट है कि यदि संचार माध्यमों को पर्याप्त विज्ञापन न मिले तो इनके बंद होने का खतरा हो सकता है |

बड़ी-बड़ी कंपनियां ही आज खेल-कूद आयोजनों एंव अन्य कार्यक्रमों को प्रायोजित करती हैं | टेलीविजन पर सीधा प्रसारण हो या रेडियो पर आंखों देखा हाल, इन सबको बड़ी-बड़ी कंपनियां ही प्रसारित करती हैं | और इसका उद्देश्य होता है उनकी वस्तुओं एवं सेवाओं का विज्ञापन | इस तरह विज्ञापन के कारण ही लोगों का मनोरंजन भी होता है | आजकल टेलीविजन पर अत्यधिक मात्रा में प्रसारित विज्ञापनों के कारण लोगों को इससे अरुचि होने लगी है | किन्तु इस बात से कैसे इनकार किया जा सकता है कि यदि विज्ञापन न हों, तो किसी कार्यक्रम का प्रसारण भी नहीं हो पाएगा | इस तरह देखा जाए तो विज्ञापन के कारण ही लोगों का मनोरंजन हो पाता है | खिलाड़ियों के लिए तो विज्ञापन कुबेर का खजाना बन चुके हैं |

आजकल तकनीकी प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ ही विज्ञापन संचार के सशक्त माध्यम के रूप में उभरे हैं | समाचार-पत्रों एंव रेडियो, टेलीविजन ही नहीं, इंटरनेट पर भी आजकल विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों को देखा जा सकता है | सरकार की विकासोन्मुखी योजनाओं, जैसे- साक्षरता अभियान, परिवार नियोजन, महिला सशक्तिकरण, कृषि एंव विज्ञान संबंधी योजनाएं, पोलियो एंव कुष्ठ निवारण अभियान इत्यादि, विज्ञापन के माध्यम से ही त्वरित गति से क्रियान्वित होकर प्रभावकारी सिद्ध होते हैं | इस तरह से विज्ञापन समाजसेवा में भी सहायक होता है |

केवल व्यावसायिक लाभों के लिए कंपनियों द्वारा ही विज्ञापनों का प्रसारण या प्रकाशन नहीं किया जाता | अब राजनीतिक दल भी अपने विचारों एवं योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन का सहारा लेते हैं | इस तरह, चुनावों के समय लोकमत के निर्माण में भी विज्ञापनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है |

विज्ञापन से यदि कई लाभ हैं, तो इससे हानियां भी कम नहीं हैं | विज्ञापन पर किए गए व्यय के कारण उत्पाद के मूल्य में वृद्धि होती है | उदाहरण के तौर पर ठंडे पेय पदार्थों को ही लीजिए | जो ठंडा पेय पदार्थ बाजार में 10 रूपये में उपलब्ध होता है, उसका लागत मूल्य मुश्किल से 5 से 7 रूपये के आस-पास होता है | किन्तु इसके विज्ञापन पर करोड़ों रुपए व्यय किए जाते हैं | इसलिए इनकी कीमत में अनावश्यक वृद्धि होती है |

कभी-कभी विज्ञापन हमारे समाजिक एंव नैतिक मूल्यों को क्षति पहुंचाता है | भारत में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव एवं उपभोक्तावादी संस्कृति के विकास में विज्ञापनों का भी हाथ है | ‘वैलेंटाइन डे’ हो या ‘न्यू ईयर ईव’ बहुराष्ट्रीय कंपनियां इनका लाभ उठाने के लिए विज्ञापनों का सहारा लेती हैं | इंटरनेट से लेकर गली-मोहल्ले तक में इससे संबंधित सामानों का बाजार लग जाता है | इस तरह कंपनियों को करोड़ों का लाभ होता है |

विज्ञापन से होने वाली एक और हानि यह है कि विज्ञापनदाताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार के भंडाफोड़ करने से जनसंचार माध्यम बचते हैं | विज्ञापनों से होने वाले आर्थिक लाभ के कारण धन लेकर समाचार प्रकाशित करने की प्रवृत्ति भी आजकल बढ़ी है | इससे पत्रकारिता के मूल्यों का हास हुआ है | मीडिया को लोकतंत्र का चतुर्थ स्तंभ कहा जाता है | विज्ञापनदाताओं के अनुचित प्रभाव एंव व्यावसायिक लाभ को प्राथमिकता देने के कारण मीडिया के उद्देश्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | कई बार यह भी देखने में आता है कि सरकारी विज्ञापनों के लोभ में समाचार-पत्र एंव टीवी चैनल सरकार के विरोध में कुछ प्रकाशित या प्रसारित नहीं करते हैं |

विज्ञापन से एकाधिकार की प्रवृत्ति का भी सृजन होता है | माइक्रोसॉफ्ट प्रारंभ से ही यह प्रयास करती रही है कि कंप्यूटर की दुनिया में उसका एकाधिकार रहे | इसके लिए वह समय-समय पर विज्ञापनों का भी सहारा लेती है | विज्ञापनों के माध्यम से एकाधिकार की लड़ाई का सबसे अच्छा उदाहरण कोकाकोला एंव पेप्सी कंपनियों के बीच विज्ञापनों की होड़ है | यह हमेशा मांग में वृद्धि करवाने में सहायक होता है |

इस तरह विज्ञापन की दुनिया एक रोचक दुनिया है | जहां पैसा है, ग्लैमर है, शोहरत है एंव सफलता की ऊंचाइयां हैं | कई मॉडलों के प्रसिद्ध होने में विज्ञापनों का योगदान रहा है | कई फिल्मों के हिट होने के पीछे भी विज्ञापन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है | विज्ञापन की दुनिया की सबसे खास बात इसकी रचनात्मकता होती है | कुछ विज्ञापन तो हास्य-व्यंग से भी भरपूर होते हैं, जिसके कारण इनसे भी लोगों का अच्छा मनोरंजन हो जाता है |

जीवन में परिश्रम का महत्व पर निबन्ध Essay On Importance Of Hardwork In Life In Hindi

जीवन में परिश्रम का महत्व पर निबन्ध Essay On Importance Of Hardwork In Life In Hindi Language

कहा गया है कि कर्म ही जीवन है | कर्म के अभाव में जीवन का कोई अर्थ नहीं रह जाता | जीवनपर्यन्त मनुष्य को कोई-न-कोई कर्म करते रहना पड़ता है | यही कारण है कि प्राचीन ही नहीं आधुनिक विश्व-साहित्य में भी श्रम की महिमा का बखान किया गया है | जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए श्रम अनिवार्य है | इसलिए कहा गया है कि- “परिश्रम ही सफलता की कुंजी है |” उन्हीं लोगों का जीवन सफल होता है या वे ही लोग अमर हो पाते हैं, जो जीवन को परिश्रम की आग में तपाकर उसे सोने की भांति चमकदार बना लेते हैं | परिश्रमी व्यक्ति सदैव अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहता है | उसके संकल्प कभी अधूरे नहीं रहते एवं मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को पार करते हुए वह निश्चित सफलता के लिए निरंतर प्रयत्नशील रहता है |

श्रम शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है | बिना श्रम शरीर अकर्मण्य हो जाता है एंव आलस्य घेर लेता है | परिश्रम करने के बाद शरीर थक जाता है, जिससे नींद अच्छी आती है | नींद में परिश्रम के दौरान हुई शारीरिक टूट-फूट की तेजी से मरम्मत होती है | श्रम का अर्थ लोग केवल शारीरिक श्रम समझते हैं, जबकि ऐसा नहीं है | शारीरिक श्रम के साथ-साथ मन-मस्तिष्क के प्रयोग को मानसिक श्रम की संज्ञा दी गई है | शारीरिक श्रम ही नहीं बल्की मानसिक श्रम से भी शरीर थक सकता है | कारखाने में काम करने वाले मजदूरों को जहां शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है, वहीँ शिक्षक, वैज्ञानिक, डॉक्टर, शोधकर्ताओं इत्यादि को मानसिक श्रम से अपने उद्देश्यों की प्राप्ति करनी पड़ती है |

यदि आदिमानव श्रम नहीं करता, तो आधुनिक मानव को इतनी सुख-शांति कहां से मिलती ! गहरी एंव चौड़ी नदियों के आर-पार आवागमन के लिए मजबूत पुल, लंबी-लंबी सड़कें, महानगर की अट्टालिकाएं, बड़े-बड़े कारखाने, बड़े समुद्री पोत, हवाई जहाज, रॉकेट, मानव की अंतरिक्ष-यात्रा इत्यादि सभी मानव के अथक श्रम के ही परिणाम हैं | अपने कठोर श्रम के ही  परिणामस्वरूप मानव आज आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, औद्योगिक एवं वैज्ञानिक रूप से अभूतपूर्व प्रगति प्राप्त करने में सक्षम हो सका है |

प्रायः देखा जाता है कि असफलता मिलने के बाद लोग आगे सफलता के लिए प्रयास करना बंद कर देते हैं | किन्तु सफलता उन्हें मिलती है, जो निरंतर प्रयासरत रहते हैं | आलसी एंव अकर्मण्य व्यक्ति जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता | वह निरा पशु के समान अपना जीवन व्यतीत कर इस संसार से विदा हो जाता है | जीवन गति का नाम है, जहां गति है, वहां जीवन है, जहां जड़ता है, वहां मृत्यु अर्थात जीवित रहते हुए भी यदि कोई बिना श्रम किए, निष्क्रिय होकर अपना जीवन व्यतीत करता है तो उस व्यक्ति को मानव के स्थान पर मानव-रूपी पशु ही कहना बेहतर होगा | जिस प्रकार जल गतिमान रहता है, उसी प्रकार जीवन भी गतिमान रहता है | यदि जल किसी स्थान पर अधिक समय तक एकत्र रहता है, तो उसमें से दुर्गन्ध आने लगती है, किन्तु बहता हुआ जल सदैव स्वच्छ और निर्मल रहता है | इसी प्रकार जीवन में अकर्मण्यता शरीर को आलसी एंव बेकार बना देती है | इसके बाद मनुष्य किसी काम का नहीं रहता | इसलिए जीवन में सफलता के लिए निरंतर परिश्रम करते रहना चाहिए |

प्रयास एवं परिश्रम से ही मनुष्य को किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त होती है | कहते हैं कि शेर को भी मृग का शिकार करना ही पड़ता है | मृग स्वयं शेर के मुख में नहीं आ जाता | निरुद्यमी मनुष्य भाग्यवादी हो जाते हैं और सब कुछ भाग्य के सहारे छोड़कर जीवन के दिन ही पूरा करते हैं | किन्तु अपने परिश्रम पर भरोसा करने वाले लोग सफलता के लिए अंतिम क्षण तक प्रयासरत रहते हैं | महादेवी वर्मा ने कहा है- “अब तक धरती अचल रही पैरों के नीचे, फूलों की दे ओट सुरभि के घेरे खींचे, पर पहुंचेगा पंथी दूसरे तट पर उस दिन, जब चरणों के नीचे सागर लहराएगा |”

अर्थात लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लहरों के समान प्रवाहमान रहने की आवश्यकता है | यदि एक स्थान पर खड़े रहकर हम आगे बढ़ने की मात्र कल्पना करते रहें और स्वयं को कष्ट देने से कतराते रहें, तो हम भवसागर को सरलता से पार नहीं कर पाएंगे | भवसागर को पार करने के लिए श्रम एवं उद्यम दोनों ही आवश्यक हैं | ईश्वर भी उन्हीं की मदद करते हैं जो स्वयं अपनी मदद करते हैं | परिश्रम करने से ही मनुष्य को अपरिमित लाभ मिलता है | उसे सुख की तो प्राप्ति होती ही है, साथ ही आत्मिक शांति भी मिलती है और यह आत्मिक सुख हृदय को पवित्रता प्रदान करता है |

जीवन की उन्नति के लिए मनुष्य हर काम करने के लिए तैयार हो जाता है, किन्तु वास्तविक सफलता प्राप्त करने के लिए उसका हर कदम ईमानदारी से भरा होना चाहिए | बेईमानी से प्राप्त की गई कोई भी सफलता न तो स्थायी होती है और न ही वह आत्मिक शांति देती है | भारतवर्ष की दासता और पतन का मुख्य कारण यही था कि यहां के निवासी अकर्मण्य हो गए थे | वह समय ऐसा था, जब लोग न तो युद्ध करना है चाहते थे और न ही संघर्षपूर्ण जीवन जीने में विश्वास करते थे | उनकी विलासिता और आरामतलबी ने देश को पराधीन बना दिया | यदि भारतीय उस युग में भी परिश्रमी होते, जागरुक होते, सतर्क रहते तो भारत कभी गुलाम न होता | किसी भी दूसरे देश की भारत पर विजय प्राप्त करने की हिम्मत न होती | सच तो यह है कि उस समय भारत में न तो कोई ऐसा आध्यात्मिक गुरु था, जो भारतवासियों को उद्यमी एवं परिश्रमी बनने की प्रेरणा देता, न ही कोई ऐसा शासक था, जिसका ध्यान देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने की ओर होता था | यही कारण है कि विदेशी आक्रांता जब भारत की सीमाओं में घुसे तो निर्बाध आगे बढ़ते ही चले गए | विश्व-विजयी बनने का स्वप्न लेकर सिकंदर भी भारत आया था, किन्तु चाणक्य जैसे कूटनीतिज्ञ की महिमा से चंद्रगुप्त, सिकंदर के विजय अभियान को रोकने में सफल रहा | इस तरह राष्ट्र की रक्षा तब ही संभव है, जब उसके नागरिक परिश्रमी हों, उद्यमी हों |

इस तरह जीवन में श्रम का अत्यधिक महत्त्व है | परिश्रमी मनुष्य को धन और यश दोनों ही मिलते हैं तथा मरणोपरांत भी वह अपने कर्मों के लिए आदरपूर्वक याद किया जाता है |

आदर्श छात्र पर निबंध Short Essay On Ideal Student In Hindi

आदर्श छात्र पर निबंध Short Essay On Ideal Student In Hindi Language

विद्यालय, महाविद्यालय एंव विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को छात्र कहा जाता है | अध्ययन काल को छात्र जीवन का स्वर्णिम काल कहा जाता है | इसी काल पर उसका भविष्य निर्भर करता है | यदि इस दौरान छात्र ठीक से पढ़ाई पर ध्यान न दें, तो उनका भविष्य अंधकारमय हो सकता है | इसलिए जो छात्र अपने छात्र जीवन के समय का सदुपयोग भली-भांति करते हुए अपने भविष्य को संवारने में निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं, उन्हें ही ‘आदर्श छात्र’ की संज्ञा दी जाती है |

छात्र का उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना होता है | शिक्षा जीवनभर चलने वाली एक प्रक्रिया है | इसके द्वारा एक व्यक्ति आत्म-निर्भर बनता है, एंव उसके चरित्र का निर्माण होता है | एक आदर्श छात्र वही होता है, जो शिक्षा के इन उद्देश्यों पर पूर्णत: खरा उतरता है | प्राचीन काल में शिक्षा के उद्देश्य चरित्र-निर्माण, व्यक्तित्व विकास, संस्कृति का संरक्षण, समाजिक कर्त्तव्यों का विकास इत्यादि थे | वर्तमान में भी शिक्षा के इन उद्देश्यों में परिवर्तन नहीं हुआ है, किन्तु इनके अतिरिक्त भी शिक्षा के कई उद्देश्य वर्तमान संदर्भ में आवश्यक हैं | वर्तमान में शिक्षा का उद्देश्य देश का सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकीकरण करना भी है | शिक्षा का उद्देश्य छात्रों में सामाजिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करना भी होता है | एक आदर्श छात्र वही होता है, जो शिक्षा के इन उद्देश्यों पर पूर्णत: खरा उतरता है |

इस तरह एक आदर्श छात्र ईमानदार होता है | वह अपनी पढ़ाई पर पूरा-पूरा ध्यान देता है, अपने साथियों के साथ मिलकर रहता है एंव आवश्यकता पड़ने पर उनका सहयोग करता है | वह अपने माता-पिता एंव शिक्षकों का सम्मान करता है एंव उनकी सेवा करने के लिए भी तत्पर रहता है | उसकी दिनचर्या प्रातः जल्दी शुरू हो जाती है | सुबह तड़के ही नित्य-क्रिया से निवृत्त होकर वह हाथ-मुंह धोता है एवं उसके बाद कुछ समय तक शारीरिक व्यायाम एंव योग करता है | इसके बाद वह स्नान कर अपनी पढ़ाई शुरु कर देता है | नम्रता, अनुशासन, ईमानदारी, बड़ों के प्रति श्रद्धा और सम्मान, परिश्रम, समय का सदुपयोग इत्यादि एक आदर्श छात्र के गुण हैं | आदर्श छात्र अपने माता-पिता और गुरुजनों का स्नेहभाजन होता है | वह समाज में भी सबका स्नेह प्राप्त करता है |

आदर्श छात्र अपने मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम, खेलकूद एवं योग को भी अपने जीवन में स्थान देता है | खेल के समय हमेशा खेल-भावना का परिचय देते हुए, अपने साथियों को प्रोत्साहित करता रहता है | खेल के द्वारा वह अपनी एंव अपने साथियों की नेतृत्व क्षमता का विकास करता है तथा शिष्टाचार एंव अनुशासन का पाठ सीखता एंव सिखाता है | जो छात्र अपने प्रत्येक कार्य नियम एंव अनुशासन का पालन करते हुए संपन्न करते हैं, वे अपने अन्य साथियों से न केवल श्रेष्ठ माने जाते हैं बल्कि सभी के प्रिय भी बन जाते हैं | शिष्टाचार एंव अनुशासन के इन्हीं महत्त्वों को समझते हुए एक आदर्श छात्र शिष्ट होता है एंव अनुशासन का पालन करता है |

आदर्श छात्र अपने कर्तव्यों का पालन सही ढंग से करता है | वह पढ़ाई के अतिरिक्त खेल-कूद को भी समय देता है | वह विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं, जैसे वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, कविता-पाठ इत्यादि में पूरे उत्साह से भाग लेता है | विद्यालय में आयोजित होने वाले विभिन्न आयोजनों में वह स्वयंसेवक की भूमिका भी निभाता है | वह विद्यालय को अपना परिवार और विद्यालय में पढ़ने वाले अन्य छात्रों को अपना मित्र समझता है | वह अपने से छोटी कक्षा के छात्रों को स्नेह देता है एंव अपने से बड़ी कक्षाओं के छात्रों का सम्मान करता है | आवश्यकता पड़ने पर वह अपने वरिष्ठ छात्रों से सहयोग प्राप्त करने में संकोच नहीं करता है |

आदर्श छात्र की भाषा संयमपूर्ण एंव शिष्ट होती है | वह अशिष्ट भाषा का प्रयोग नहीं करता | वह हमेशा शिष्टाचार का ही पालन करता है | वह भूल कर भी अपने साथियों से नहीं झगड़ता |

विद्यार्थी को छात्र जीवन में सुख की प्राप्ति मुश्किल होती है | उसे दिन-रात परिश्रम करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी करनी होती है | इसलिए संस्कृत में कहा गया है- “सुखार्थिन: कुतो विद्या, विद्यार्थिन: कुतो सुखम”, अर्थात “सुख चाहने वालों को विद्या की प्राप्ति एंव विद्या के अभिलाषी को सुख की प्राप्ति नहीं हो सकती |” सुबह उठकर पढ़ाई करना, दिन भर विद्यालय में पढ़ाई करना, उसके बाद रात को सोने से पहले पढ़ाई करना, पढ़ाई की इन समयावधियों के बीच शारीरिक एंव मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से खेल-कूद एवं व्यायाम को भी दिनचर्या में शामिल करना, यह किसी भी व्यक्ति के लिए कष्टदायी हो सकता है | किन्तु जीवन में सफलता के दृष्टिकोण से यह अनिवार्य है | कुछ खोए बिना, कुछ पाना भी तो मुश्किल है | यदि सुख की कीमत पर विद्या की प्राप्ति होती है, तो क्या कम है ! क्योंकि विद्या तो अनमोल है | इस विद्या के परिणामस्वरुप व्यक्ति का भविष्य सुखमय हो जाता है एंव छात्र जीवन के कष्ट की भरपाई हो जाती है |

आदर्श छात्र अपने देश की एकता एंव अखंडता के महत्व को समझता है | वह सभी धर्मों का समान भाव से सम्मान करता है एंव किसी व्यक्ति में जाति, धर्म, लिंग इत्यादि के आधार पर भेदभाव नहीं करता | आदर्श छात्र चूंकि अनुशासित जीवन व्यतीत करता है एंव शिष्टाचार का पालन करता है, इसलिए उसमें नेतृत्व की भावना का विकास स्वाभाविक रुप से हो जाता है |

नि:संदेह छात्र ही देश के भविष्य हैं | आदर्श छात्रों से ही देश के अच्छे भविष्य की आशा की जा सकती है | वे ही देश को सही नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं, क्योंकि छात्र जीवन के दौरान शिष्टाचार, अनुशासन एवं ईमानदारी के गुण उनमें इस तरह कूट-कूट कर भरे जाते हैं | आदर्श छात्र ही भविष्य में देश की एकता एंव अखंडता को कायम रखकर, इसे बढ़ाने में सहयोगी हो सकते हैं | इस तरह आदर्श छात्र देश के भविष्य एंव समाज के लिए गौरव होते हैं |

Older posts
Newer posts