पत्थरचटा के फायदे -हिंदी में Patharchatta Ke Labh or Fayde

पत्थरचटा के फायदे -हिंदी में Patharchatta Ke Labh or Fayde Hindi Me

पत्थरचटा का पौधा हिमालय के गर्म स्थलों पर पैदा होता है। वैसे तो सारे भारत में इसका बहुवर्षीय पौधा चट्टानों के बीच की जो दरारें होती हैं, उनमें से इसका तना बाहर निकला दिखाई पड़ता है। इसके पते मांसल, अंडाकार, 5-6 इंच व्यास के किनारों पर दंत युक्त, ऊपरी सतह पर हरे रंग के और निचली सतह पर मटमैले, लाल आभा लिए होते हैं।

छोटे-छोटे पुष्प सफेद, गुलाबी या बैंगनी रंग के अप्रैल-मई महीने में लगते हैं। फल छोटे, नीली आभा लिए व सफेद रंग के होते हैं।  वानस्पतिक भेद से निघण्टुरत्नाकर में इसके तीन भेद किए गए हैं। पहला-पाषणभेद, दूसरा-श्वेत पाषाणभेद और तीसरा-वटपत्री पाषाण भेद। पत्थरचटा की जड़ लाल रंग की, मोटी व 1-2 इंच लंबी होती है। इसके चारों ओर से अनेक छोटी-छोटी जड़ें निकलकर फैली होती हैं। जड़ के टुकड़े ही बिकते हैं।

इनके बारे में ये भी जाने 

  1. सूजन पर पत्थरचटा से ईलाज Swelling Per Patharchatta Se Ilaaj
  2. चोट, जख्म और रक्तस्राव में पत्थरचटा से लाभ Chott, Jakham Aur Bleading Me Patharchatta
  3. नेत्र पीड़ा, आंखें आने पर पत्थरचटा से उपाय Eye Pain, Remedies With Eyes On Patharchatta
  4. दंत रोगों में पत्थरचटा Dant Rogo Me Patharchatta
  5. दांत निकलने के कष्ट में पत्थरचटा का सेवन  Teeth Nikalne Ke Kast Me Patharchatta
  6. रक्त प्रदर में पत्थरचटा का सेवन Raktpradar me patharchatta ka sevan
  7. पेशाब में जलन के लिए पत्थरचटा Peshab Me Jalan Ke Liye Patharchatta
  8. पथरी के लिए पत्थरचटा Pathri Ke Liye Patharchatta
  9. पेट दर्द के लिए पत्थरचटा का सेवन Stomach Pain Ke Liye Patharchatta
  10. खांसी के लिए कारगर पत्थरचटा Cough Ke Liye Kargaar Patharchatta
  11. अतिसार में पत्थरचटा का सेवन Atisaar Me Patharchatta
  12. रक्तपित्त में पत्थरचटा का सेवन Raktpith Me Patharchatta Ka Sevan

पत्थरचटा के विभिन्न भाषाओं में नाम Patharchatta Ke Vibhinn Bhasao Ke Name

  • संस्कृत में (Patharchatta In Sanskrit)– पाषाण भेद।
  • हिन्दी में (Patharchatta In Hindi) – पत्थरचटा, पथरचूर।
  • मराठी में (Patharchatta In Marathi) – पखान भेद।
  • गुजराती में (Patharchatta In Gujarati) – पाखाण भेद।
  • बंगाली में (Patharchatta In Bangali) – पाथुरचुरी।
  • अंग्रेज़ी में (Patharchatta In English) – इंडियन रॉकफोइल (Indian Rockfoil)।
  • लैटिन में (Patharchatta In Latin) – साक्सीफ्रेगा लिग्युलेटा (Saxifraga Ligulata)

पत्थरचटा के औषधीय गुण Pattarchatta Ke Aushdhiy Gun

आयुर्वेदिक मतानुसार पत्थरचटा रस में तिक्त, कषाय, गुण में लघु, स्निग्ध, तीक्ष्ण, तासीर में शीतल,विपाक में कटु, वात,पित्त और कफनाशक, शोथ हर और स्तम्भक होता है। यह पथरी, श्वेत प्रदर, मूत्रकृच्छ, मूत्राघात, खांसी, आमातिसार, फेफड़ों के विकार, रक्तस्त्राव, चोट, घाव, सूजन, प्रमेह, वातरक्त, पीलिया उन्माद, रक्त   प्रदर, ज्वर, विषनाशक, उदरशूल में गुणकारी है।

यूनानी चिकित्सा पद्धति में पत्थरचटा को दूसरे दर्जे का गर्म और रुक्ष माना जाता है। यह पथरी, शोथ, शुक्रमेह, पेट दर्द, पाण्डु की उत्तम औषधि है।

वैज्ञानिक मतानुसार पत्थरचटा की रासायनिक संरचना का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है कि इसकी जड़ में अल्युमिन 73 प्रतिशत, ग्लूकोज़ 51 प्रतिशत, पिच्छिल द्रव्य 21 प्रतिशत, स्टॉर्च 19 प्रतिशत, टेनिक एसिड 14:2 प्रतिशत, खनिज लवणं, गैलिक एसिड, मोम, भस्म सभी 12.87 प्रतिशत (जिसमें कैल्शियम आक्जलेट सबसे अधिक होता है) मेंमेटार्बिन और सुगंधित द्रव्य भी पाए जाते हैं।

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पत्थरचटा के विभिन्न रोगों में प्रयोग और आयुर्वेदिक  उपचार Patharchatta Ke Podha Ke Aushdhiy Gun Aur Gharelu Upchaar

1. सूजन पर पत्थरचटा से ईलाज Swelling Per Patharchatta Se Ilaaj :

पत्थरचटा को सूजन को ठीक करने वाला भी कहा जाता है | किसी को सुजन की शिकायत हो तो उसे पत्थरचटा के पत्तों को तवे पर गर्म कर सूजन पर बांधने से आराम मिलेगा।

2. चोट, जख्म और रक्तस्राव में पत्थरचटा से लाभ Chott, Jakham Aur Bleading Me Patharchatta :

चोट और जकम होने पर पत्थरचटा को इस्तेमाल किया जाता है | पत्थरचटा के पत्ते को पीसकर लुगदी बांधने से रक्तस्राव रुकेगा और घाव शीघ्र भरेगा। चोट ठीक होने तक इसका प्रयोग दोहराते रहें।

3. नेत्र पीड़ा, आंखें आने पर पत्थरचटा से उपाय Eye Pain, Remedies With Eyes On Patharchatta :

आँखों के रोगों में भी यह लाभकारी औषधि है | पत्तों को पीसकर बनी लुगदी आंखें बंद कर पलकों के ऊपर रखकर पट्टी बांध दें। इससे सूजन, आंखों की पीड़ा दूर होगी।

4. दंत रोगों में पत्थरचटा Dant Rogo Me Patharchatta :

पत्थरचटा की जड़, अजवायन और माजूफल सम भाग मिलाकर पीस लें। तैयार चूर्ण को एरण्ड के तेल में मिलाकर मसूड़ों और दांतों पर मलकर पांच मिनट बाद गुनगुने पानी से गरारे करने से समस्त दंत और मसूड़ों के रोगों में लाभ होता है।

5. दांत निकलने के कष्ट में पत्थरचटा का सेवन  Teeth Nikalne Ke Kasth Me Patharchatta :

पत्थरचटा के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर मसूड़ों पर रोजाना मलते रहने से बच्चों के दांत आसानी से निकल आते हैं और मुंह के छालों की तकलीफ भी नहीं होती। अतिसार, ज्वर की तकलीफ दूर होती है।

6. रक्त प्रदर में पत्थरचटा का सेवन Raktpradar me patharchatta ka sevan  :

आंवला, नागकेसर और पत्थरचटा की जड़ का चूर्ण समभाग मिलाकर पीस लें। एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार शहद के साथ सेवन करने से लाभ होगा।

7. पेशाब में जलन के लिए पत्थरचटा Toilet Me Jalan Ke Liye Patharchatta :

पेशाब की जलन होने पर पत्थरचटा का प्रयोग किया जा सकता है | दूध की लस्सी के साथ पत्थरचटा की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सेवन करने से जलन दूर होकर आराम मिलता है।

8. पथरी के लिए पत्थरचटा Pathri Ke Upchar Ke Liye Patharchatta Prayog Kare

पत्थरचटा के पते, फूल, फल व जड़ सभी सम भाग मिलाकर एक गिलास पानी में पकाएं। जब आधा पानी रह जाए, तो इसको तीन मात्रा में विभाजित कर दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्ते सेवन से पथरी गल जाएगी।

9. पेट दर्द के लिए पत्थरचटा का सेवन Stomach Pain Ke Liye Patharchatta :

पेट के दर्द में पत्थरचटा का प्रयोग किया जाता है | पेट दर्द की स्थिति में पत्थरचटा के 2-3 पत्तों को हलका नमक लगाकर सेवन कराएं या पत्तों के एक चम्मच रस में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण मिलाकर खिलाएं। इससे पेट दर्द में राहत मिलेगी |

10. खांसी के लिए कारगर पत्थरचटा Cough Ke Liye Kargaar Patharchatta :

खांसी और कफ जैसी समस्या कि लिए पत्थरचटा उपयोगी होता है | इसके लिए पत्थरचटा के पत्तों और जड़ का समभाग चूर्ण मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार शहद के साथ चटाएं।

11. अतिसार में पत्थरचटा का सेवन Atisaar Ka ilaj Patharchatta se Kare

अतिसार यानि लूज मोशन के इलाज में पत्थरचटा लाभकारी औषधि है | इसके लिए एक कप बकरी के दूध के साथ पत्थरचटा की जड़ के चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दिन में 3 बार सेवन करने से अतिसार में लाभ होगा।

12. रक्तपित्त में पत्थरचटा का सेवन Raktpith Me Patharchatta Ka Sevan :

पत्थरचटा की जड़ का चूर्ण, नागकेसर के चूर्ण में सम भाग मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में दूब के 2 चम्मच रस के साथ दिन में 3 बार दें।

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