ऋषिकेश के पर्यटन स्थल की जानकारी Rishikesh History And Travel Guide

ऋषिकेश के पर्यटन स्थल की जानकारी Rishikesh History And Travel Guide

ऋषिकेश हरिद्वार से लगभग 23 कि. मी. तथा देहरादून से 29 कि.मी. की दूरी पर स्थित है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री तथा यमुनोत्री जाने के लिए ऋषिकेश से सुगम रास्ता है। ऋषिकेश की गिनती अत्यन्त पवित्र स्थानों में होती है। यात्रियों के ठहरने और भोजन की यहां अच्छी व्यवस्था  है। यहां केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही मिलता है।

ऋषिकेश के ठीक बीच में भरत मंदिर पड़ता है। कहा जाता है कि यहां भरत जी ने तपस्या की थी। यह भी प्रचलित है कि ऋषियों की तपस्या से भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हें कहा कि यहां मेरी मूर्ति भरत के नाम से विख्यात होगी। मुख्य मंदिर में प्रवेश करने से पहले सात दालान पार करने पड़ते हैं। जिनमें से पहले दालान के नीचे पानी बहता रहता है जो  मंदिर में प्रवेश करने वाले यात्रियों के पांवों को धो देता है।

यहां एक संस्कृत विश्वविद्यालय भी है। भरत मंदिर से पूर्व की ओर थोड़ी दूरी पर कुबजा भ्रक नामक घाट भी है, जिसमें तीन स्रोतों से जल आता है। इसलिए इसे त्रिवेणी कहते हैं। इस घाट में स्नान करने के लिए स्त्री-पुरुषों की भीड़ लगी रहती है। त्रिवेणी घाट के दक्षिण में भगवान श्री रघुनाथ का मंदिर है। मंदिर में प्रवेश करने से पूर्व कुंड में पितरों को तर्पण करते हैं।

ऋषिकेश नगर में उत्तर की ओर 4-5 कि.मी. की दूरी पर लक्ष्मण झूला है (laxman jhula bridge rishikesh uttarakhand)। ऐसी मान्यता है कि लक्ष्मण जी ने गंगाजी की पार करने के लिए यहां बाणों से एक पुल तैयार किया था। यह एक झूला पुल है जो लगातार हिलता रहता है। इसे लक्ष्मण झूला भी कहा जाता है। लक्ष्मण झूले के पास ही लक्ष्मण जी का प्राचीन मंदिर है। मंदिर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। मंदिर से थोड़ा सा आगे लक्ष्मण घाट है जिसमें नहाने का बड़ा महात्म्य है। लक्ष्मण मंदिर के साथ ही सिद्धपीठ स्वर्ग निवास मंदिर है। इस मंदिर गंगा तट पर स्नान करते श्रद्धालु के ठीक सामने श्री गंगा मंदिर है, जिसमें देवी-देवताओं, 24 अवतारों, द्रौपदी सहित पांच पाण्डवीं व श्री 1008 फलाहारी बाबा महन्त मणिराम दास की गद्दी है। मंदिर में भूमिगत शिवपुरी है, जहां ब्रह्मा, शिव-पार्वती, सीता, राम, लक्ष्मण आदि की मूर्तियां हैं।

लक्ष्मण झूले से दो किलोमीटर दक्षिण में मुनि की रेती नामक स्थान पड़ता है। यहां पर बदरीनारायण तथा शत्रुघ्न के प्राचीन मंदिर हैं। यहीं गंगा के ऊपर श्री शिवानन्द झूला है। इस झूले को पार करके पूर्व की ओर स्वर्ग आश्रम मंदिर है। यहां 24 अवतारों की मूर्तियों के साथ पौराणिक कथाओं के चित्र अंकित हैं। यहीं पर एक लक्ष्मीनारायण का भव्य मंदिर भी है। गीता भवन से थोड़ा आगे परमार्थ निकेतन है। इसमें पौराणिक कथाओं पर आधारित मूर्तियां हैं। शीशों के चेम्बर में अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां भी यहां है। यहां सिख धर्मावलम्बी दर्शनों के लिए आते हैं। यहां सभी धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की आधुनिक व्यवस्था है।