वलवेरिल्ला मशरूम की खेती – Volvariella Mushroom Ki Kheti Kaise Kare

वलवेरिल्ला मशरूम की उन्नत खेती कैसे करें Volvariella Mushroom Ki Kheti Kaise Kare

यह भी एक मशरूम की किस्म है जो अत्यधिक स्वादिष्ट तथा मैदानी क्षेत्रों में पूरे वर्ष उगने वाली मशरूम है । इसकी खेती धान के पुआल पर सफलतापूर्वक की जा सकती है जहां पर 25 डी०सेग्रेड तापमान से कम रहता है । वहां मुश्किल खेती की जाती है जहां पर तापमान अधिक रहता है । अर्थात् 25-32 डी०सेग्रेड तापमान पर सुगमतापूर्वक उगाया जाता है ।

Volvariella Mushroom Ki Kheti Kaise Kare

वलवेरिल्ला मशरूम की खेती के लिए स्थान का चुनाव (Selection of Place for Volvariella Kheti)

खेती करने हेतु स्थान का चुनाव मुख्यत: पक्का फर्श सीमेन्ट या ईंटों का बना हो । यहां तक कि तख्तों को नीचे बिछा कर भी उगा सकते हैं । यदि कमरे उपलब्ध न हों तो फर्श के ऊपर छाया कर कमरे की तरह तिरपाल, छप्पर या टाट के बोरों द्वारा छाया करके स्थान चुना जा सकता है । नीचे बिछाने हेतु पुआल को छोटे-छोटे गट्‌ठरों या बण्डलों में बांधे जो लगभग एक किलो से अधिक का बण्डल न हो, चुनना चाहिए ।

पुआल का मिश्रण तैयार करना

इन धान के पुआलों के गट्‌ठरों या बण्डलों को साफ पानी द्वारा साफ करके किसी पानी से भरी गुंडी या बड़ी नांद में डुबोकर 15-20 घंटे रखें । तत्पश्चात् पूलों को निकालकर थोड़ी देर रख दें जिससे पानी की मात्रा निचुड़ जाये । इस प्रकार से इन पूलों को फर्श पर एक-दूसरे के विपरीत बिछायें अर्थात् इसका एक भाग बंधा हुआ दूसरा भाग खुला हुआ रखते हैं, तथा इसी प्रकार से एक दूसरी परत पूलों की ऊपर लगायें जिससे डबल परत का चट्‌टा-सा बन जाता है ।

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स्पान की बुवाई का ढंग (Method of Sowing to The Span)

स्पान को लेकर यदि ये बड़े हों तो 2.5-3.0 सेमी. के छोटे-छोटे टुकड़ों में तैयार कर लेते हैं । इन स्पान या बीज को ट्रे, पेटियों में किनारे 4-5 सेमी. छोड्‌कर बीज के आपस की दूरी 8-10 सेमी. की दूरी पर बोयें । स्पान को बोने से पहले एवं बोने के बाद यदि सम्भव हो सके तो चने तथा अरहर के छिलके सहित दाल के टुकड़ों को स्पान रखने के स्थान पर तथा बोने के बाद ऊपर भी छिड़क दें तथा दूसरी सतह पुआल की पहली सतह के विपरीत बनायें तथा उसी प्रकार से बीज बोयें । अत: एक चट्‌टे में दो बोतल स्पान की आवश्यकता होती है । इसी प्रकार से अंतिम सतह बनाने के लिये पुआल के पूले ऊपर से रख दें तथा चट्‌टे को सावधानी के साथ चारों ओर से हल्का-सा दबा दें जिससे पुआल व बीज का आपस में अच्छा सम्पर्क बन जाये तथा बीज वृद्धि करने लगें । यदि आवश्यक हो तो हल्के पानी का छिड़काव करें । जिससे पर्याप्त नमी बनी रहे । इसके बाद चट्‌टे पर सफेद, शीशा रंग वाली पॉलिथीन से ढक दें जिससे नमी शीघ्र समाप्त न हो । धीरे-धीरे स्पान वृद्धि करके बड़े होने लगते हैं ।

सिंचाई का प्रबन्ध (Management of Irrigation)

तैयार किये गये पुआल के चट्‌टे को चार दिन में एक बार सुबह-शाम पोलिथीन हटाकर पानी से अच्छी तरह से तरकर नमी बनाये रखें । बीजों की बुवाई करने के 10-12 दिन के अन्दर खुम्बी बननी आरम्भ हो जाती है । यह किनारों से आरम्भ होती है तथा शुरू में सफेद और घड़ीनुमा बढ़ती है ।

तुड़ाई या कटाई (Plucking / Harvesting)

खुम्बी की छत्तरी-सी बन जाने के बाद तुरंत तोड़ लें, यह तुड़ाई हाथ या तेज चाकू से काट लिया जाता है । देर से तोड़ने पर खराब होने का अन्देशा रहता है । क्योंकि नीचे से काला रंग पड़ने लगता है । इस प्रकार एक बार खुम्बी निकलने के पश्चात् कुछ दिन के लिये बन्द हो जाती है । तत्पश्चात् दूसरी फसल आरम्भ हो जाती है ।

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पैदावार (Yield)

यह खुम्भी सुविधानुसार अनुकूल सुविधानुसार एक चट्‌टे के क्षेत्र से लगभग 3-4 किलो उपज तक प्राप्त हो सकती है । अन्यथा 2½ -3 किलो औसतन उपज मिल जाती है ।

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